पुरोला। उत्तराखंड सरकार ने यमुना घाटी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार ने पुरोला के प्रसिद्ध श्रीगुल मंदिर सहित क्षेत्र के छह मंदिरों के सौंदर्यकरण के लिए शासनादेश (जीओ) जारी कर दिया है। इस फैसले से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। शासनादेश के अनुसार पुरोला गांव स्थित ऐतिहासिक श्रीगुल मंदिर के अलावा ग्राम पंचायत खलाड़ी के जागमाता मंदिर, महारगांव के भगवती मंदिर, सुनाली के रघुनाथ मंदिर, कण्डियाल गांव के कपिल मुनि मंदिर और कोटला भसुना के रघुनाथ मंदिर का सौंदर्यकरण किया जाएगा।

इन मंदिरों में मंदिर परिसर का विकास, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही पर्यटन की दृष्टि से भी विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगे।
पूर्व विधायक मालचंद ने शासनादेश जारी होने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि यमुना घाटी के इन प्रमुख धार्मिक स्थलों के सौंदर्यकरण की मांग लंबे समय से की जा रही थी। मुख्यमंत्री ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए स्वीकृति प्रदान की है।
उन्होंने कहा कि श्रीगुल मंदिर पुरोला क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिरों का सौंदर्यकरण होने से अधिक संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचेंगे। इससे स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा।
इधर, क्षेत्रवासियों ने भी सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिरों के विकास से यमुना घाटी की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी।
