देहरादून: चारधाम यात्रा-2026 के सफल और सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को जनपद देहरादून में बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह अभ्यास राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के तत्वावधान में चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ संचालित किया गया, जिसमें विभिन्न आपदा परिदृश्यों पर त्वरित प्रतिक्रिया और समन्वय का परीक्षण किया गया।
जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से सुबह 9:45 बजे आपदा संबंधी सूचनाएं प्रसारित की गईं। इसके तहत ऋषिकेश यात्रा ट्रांजिट कैंप में आग लगने, मौसम विभाग द्वारा रेड अलर्ट जारी होने के बाद तीर्थयात्रियों की बढ़ती भीड़, तथा देहरादून की रिस्पना नदी में बादल फटने से आई बाढ़ जैसे हालातों का अभ्यास किया गया। साथ ही गांधी शताब्दी अस्पताल में घायलों के उपचार की व्यवस्थाओं को भी परखा गया।

जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर कंट्रोल रूम से त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी इंसीडेंट कमांडरों को रेस्क्यू टीमों को तुरंत घटनास्थल पर भेजने के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलते ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें सक्रिय हो गईं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया।
ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में आग लगने की स्थिति में पूरे कैंप को सुरक्षित रूप से खाली कराया गया। अभ्यास के दौरान पांच यात्रियों को गंभीर रूप से घायल मानते हुए उन्हें एंबुलेंस से एम्स ऋषिकेश भेजा गया, जबकि अन्य घायलों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। अग्निशमन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पाया।
वहीं रेड अलर्ट के चलते ट्रांजिट कैंप में बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यात्रियों को राहत शिविरों, होटलों और धर्मशालाओं में व्यवस्थित रूप से शिफ्ट किया गया। इससे भीड़ प्रबंधन की तैयारियों का सफल परीक्षण किया गया।

तीसरे परिदृश्य में रिस्पना नदी में बाढ़ की स्थिति में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान चलाया। इस दौरान कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और प्रभावितों को राहत शिविरों में ठहराकर भोजन, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। साथ ही लोगों को नदी से दूर रहने की सलाह भी दी गई।
मॉक ड्रिल के बाद अधिकारियों ने समीक्षा बैठक कर रेस्क्यू टीमों को भविष्य में और बेहतर समन्वय व सतर्कता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने अभ्यास में सामने आई कमियों को दूर करने पर जोर दिया।

एनडीएमए के विशेषज्ञों ने मॉक ड्रिल को सफल बताते हुए कहा कि इस तरह के अभ्यास से आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने बेहतर संचार व्यवस्था, त्वरित निर्णय क्षमता और एजेंसियों के बीच समन्वय को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया।
