International Union for Conservation of Nature (आईयूसीएन) प्रतिनिधिमंडल ने पुरोहितवाला में जल संरक्षण कार्यों का किया अवलोकन

देहरादून। जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग एवं प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गठित आईयूसीएन के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार, 26 फरवरी को जनपद देहरादून स्थित ग्राम पुरोहितवाला (बाणगंगा जलागम क्षेत्र) का भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल ने स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन के तहत संचालित कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत जानकारी ली।

आईयूसीएन के 11 देशों से आए 17 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बाणगंगा जलागम क्षेत्र में वर्षा जल संचयन, स्रोत संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण संरचनाएं, कंटूर ट्रेंच, चेकडैम, चाल-खाल निर्माण एवं सामुदायिक सहभागिता आधारित जल प्रबंधन कार्यों का अवलोकन किया। प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार ने स्प्रिंग शेड में निर्मित प्राकृतिक संरचनाओं के निर्माण, उपयोग एवं सकारात्मक परिणामों की जानकारी दी।

सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण

प्रतिनिधिमंडल ने स्प्रिंग एवं रिज्युविनेशन ऑथोरिटी (SARA), वन विभाग और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए इसे जल संरक्षण का उत्कृष्ट मॉडल बताया। टीम ने कहा कि इस प्रकार की पहलें जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणादायक बन सकती हैं।

विद्यालय में संवाद और पौधारोपण

पुरोहितवाला भ्रमण के बाद प्रतिनिधिमंडल मानव भारती एंगल हिल्स स्कूल पहुंचा, जहां स्थानीय नागरिकों ने उनका स्वागत किया। प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से संवाद कर उनके अनुभव सुने और विद्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया।

ब्रिज गैप परियोजना के तहत अध्ययन

सारा की एसीईओ डॉ. कहकशां नसीम ने बताया कि जल स्रोतों के संरक्षण हेतु वैश्विक स्तर पर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में आईयूसीएन द्वारा ‘ब्रिज गैप’ परियोजना संचालित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत असम में मेघना नदी के संरक्षण पर कार्य किया गया है। उत्तराखंड में जल संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों के अध्ययन के उद्देश्य से यह प्रतिनिधिमंडल यहां पहुंचा।

उन्होंने बताया कि ग्राम पुरोहितवाला में एक सक्रिय जल संरक्षण समूह सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण कर रहा है। विशेष रूप से ‘अंगेलिया’ वन क्षेत्र स्वच्छ और सुव्यवस्थित अवस्था में है। सारा और वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से किए गए जल एवं मृदा संरक्षण कार्यों से जल प्रवाह (डिस्चार्ज) में वृद्धि हुई है और स्थानीय समुदाय में सकारात्मक उत्साह देखा जा रहा है।

11 देशों के प्रतिनिधि रहे शामिल

प्रतिनिधिमंडल में यूनाइटेड किंगडम, नॉर्वे, पोलैंड, जर्मनी, इक्वाडोर, जिम्बाब्वे, अमेरिका, स्पेन, कैमरून, केन्या, ताजिकिस्तान और भारत के प्रतिनिधि शामिल रहे।

क्षेत्र भ्रमण के दौरान सारा की एसीईओ डॉ. कहकशां नसीम, उप निदेशक डीएस रावत, डीएफओ नीरज कुमार, अधीक्षण अभियंता संजय रॉय, अधिशासी अभियंता दीक्षांत गुप्ता, जिला विकास अधिकारी संजीव कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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