डीएम के मानवीय हस्तक्षेप से दो जरूरतमंद महिलाओं को मिली 1-1 लाख की आर्थिक सहायता

देहरादून। जनपद में असहाय और जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के प्रति जिला प्रशासन लगातार संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। जिलाधिकारी के मानवीय हस्तक्षेप से कठिन परिस्थितियों से जूझ रही दो महिलाओं को सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड से 1-1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी न्याय कुमकुम जोशी ने दोनों प्रकरणों की जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी, जिसके आधार पर सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की गई।

पति के लापता होने के बाद 5 बच्चों का सहारा बनी मीना ठाकुर

सुद्दोवाला निवासी मीना ठाकुर ने जिलाधिकारी से मिलकर अपनी समस्या बताई। उनके पति पिछले लगभग आठ वर्षों से लापता हैं और अब तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है। ऐसे में पांच बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी मीना ठाकुर पर आ गई है।

मीना ठाकुर किराये के मकान में रहकर कठिन परिस्थितियों में परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। उनके परिवार में चार बेटियां और एक बेटा है, जिनमें दो बेटियां दिव्यांग हैं। बच्चों की शिक्षा और दिव्यांग बेटियों के उपचार की जिम्मेदारी के कारण उन पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ गया था।

जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएसआर फंड से 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेज दी गई है। साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि परिवार को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाया जाए तथा बेटियों की शिक्षा को प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा के माध्यम से जारी रखा जाए।

आर्थिक तंगी से जूझ रही अमृता जोशी को भी मिली मदद

खुड़बुड़ा क्षेत्र में किराये के मकान में रहने वाली परित्यक्ता महिला अमृता जोशी घरों में काम कर अपने दो बच्चों का भरण-पोषण कर रही थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी।

अमृता जोशी का बड़ा बेटा मानसिक विकार से पीड़ित है, जिसके उपचार में लगातार खर्च हो रहा था। वहीं छोटे बेटे की कई महीनों से फीस जमा न होने के कारण उसे स्कूल से निकाल दिया गया था। आर्थिक तंगी के कारण मकान का किराया भी समय पर नहीं दे पाने से मकान मालिक ने उन्हें घर से बाहर कर दिया था।

अमृता जोशी की स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी ने सीएसआर फंड के माध्यम से 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उनके बैंक खाते में हस्तांतरित करवाई। इस राशि से वह अपने बेटे का उपचार, स्कूल फीस और मकान का बकाया किराया अदा कर सकेंगी।

जिलाधिकारी की इस पहल से संकटग्रस्त परिवारों को राहत मिली है। जिला प्रशासन का कहना है कि जरूरतमंद नागरिकों की सहायता के लिए आगे भी ऐसे मानवीय प्रयास जारी रहेंगे।

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