नारद जयंती पर गोष्ठी में पत्रकारिता की भूमिका पर हुई चर्चा, देवर्षि नारद को बताया गया संवाद, सत्य और तटस्थता का प्रतीक

 

आरएसएस प्रचार विभाग का पहला कार्यक्रम न्यू रिपब्लिक प्रेस क्लब में हुआ

नई टिहरी:  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचार विभाग की ओर से नारद जयंती के अवसर पर न्यू इन्वेस्टर्स प्रेस क्लब में आयोजित कलाकारों में पत्रकारिता की भूमिका पर विचार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता के रूप में आरएसएस के विभाग समरसता के प्रमुख डॉ. गोविंद पुंडीर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सुशील कोटनाला ने देवर्षि नारद के जीवन और उनके व्यक्तित्व स्वरूप को केंद्र में रखते हुए विस्तार से चर्चा की।आ

डॉ. कोटनाला ने कहा कि देवर्षि नारद केवल सिगरेट के वाहक नहीं थे, बल्कि सत्य, निर्भीकता और तटस्थता के प्रतीक थे। वे देवता, असुर, ऋषि-मुनि, यक्ष, गंधर्व सहित संपूर्ण चराचर जगत के बीच संवाद स्थापित करने का कार्य करते थे। उन्होंने बताया कि नारद के कार्य में केवल सूचना देना नहीं था, बल्कि समाज को सलाह देना और संवाद के माध्यम से सभी लक्ष्य को सही जानकारी उपलब्ध कराना भी उनके दायित्वों में शामिल था।

स्ट्रेंथ ने कहा कि आधुनिक पत्रकारिता के कई माध्यम ही विकसित हो गए हैं, लेकिन आज भी नारद की मानसिकता बेकार है। आज जब मीडिया कई बार पूर्वाग्रही या पूर्वाग्रही से प्रभावित दिखता है, ऐसे समय में नारद जैसा तटस्थ और सत्यनिष्ठ नैतिकता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।

 

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