गुरु कैलापीर बग्वाल मेले में उमड़ी आस्था, पुडांरा के सेरा में देव निशान के साथ सात बार दौड़ी श्रद्धालु समुदाय
नई टिहरी। भिलंगना ब्लॉक के बूढ़ाकेदार में आयोजित प्रसिद्ध गुरु कैलापीर बग्वाल मेला अपने तीसरे दिन आस्था और परंपरा के चरम स्वरूप के साथ मनाया गया। जैसे ही सुबह देवता के बाहर आने का आह्वान किया गया, दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े और पारंपरिक उत्साह के साथ देव निशान के साथ पुडांरा के सेरा की ओर आस्था की दौड़ में शामिल हुए। इस दौरान वातावरण गुरु कैलापीर के जयकारों, सीट की लयबद्ध ध्वनियों और उत्सव की ऊर्जा से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने देवता के निशान पर पुआल और फूल अर्पित कर अपने परिवारों और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की, जबकि मैदान में श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस दृश्य को और अधिक अद्भुत बना दिया।
मेले की शुरुआत से ही बूढ़ाकेदार क्षेत्र दीपावली के रंगों में डूबा रहा। बुधवार रात बड़ी दीपावली के अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक भैलों के साथ सामूहिक दीपावली खेली, जिसकी चमक और उल्लास पूरे क्षेत्र में दूर तक दिखाई दिया। गुरुवार सुबह से ही गुरु कैलापीर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। लोग ढोल-दमाऊं और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर देवता के बाहर आने का आह्वान करते रहे। लगभग सवा एक बजे देवता के पश्वा ने 20 फीट लंबे चांदी के पवित्र निशान को मंदिर की खिड़की से बाहर निकालकर परंपरा की शुरुआत का संकेत दिया। जैसे ही निशान बाहर निकला, श्रद्धालुओं की भीड़ उमंग के साथ पुडांरा के सेरा की ओर दौड़ पड़ी और परंपरागत नियमों के अनुसार सात बार खेतों का चक्कर लगाया गया।
पवित्र दौड़ पूरी करने के बाद लोगों ने श्रद्धा से देव निशान पर पुआल और फूल चढ़ाए। देवता की कृपा के प्रतीक इस अनुष्ठान को भक्तों ने अत्यंत आस्था और भक्ति भाव से निभाया। इसके बाद निशान को पुनः मंदिर में अपने मूल स्थान पर स्थापित कर दिया गया, जहाँ भक्तों ने एक-एक कर देवता के दर्शन किए। मेले में स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने वातावरण को और अधिक जीवंत कर दिया, जिसमें पहाड़ी संस्कृति की विविध छवियाँ मंच पर प्रदर्शित हुईं।
मेले के मुख्य अतिथि विधायक शक्ति लाल शाह ने कहा कि बूढ़ाकेदार धाम और गुरु कैलापीर पूरे क्षेत्र के आराध्य देवता हैं और इनके आशीर्वाद से ही यहां के पर्व और परंपराएं निरंतर जीवंत रहती हैं। उन्होंने कहा कि गुरु कैलापीर मेला पहाड़ की सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा है और क्षेत्र के विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य जारी है।
