देहरादून: उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) और पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) के बीच बेहतर समन्वय और वर्षों से लंबित तकनीकी एवं प्रशासनिक मामलों के समाधान के उद्देश्य से शनिवार को संयुक्त समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता दोनों निगमों के प्रबंध निदेशक पी.सी. ध्यानी ने की।
एमडी पी.सी. ध्यानी की पहल पर पहली बार दोनों निगमों के मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और वरिष्ठ अधिकारियों को एक साझा मंच पर लाया गया। बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लंबित मामलों पर विस्तार से चर्चा हुई और कई मामलों का समाधान मौके पर ही कर दिया गया।
बैठक में भूमि एवं परिसंपत्तियों के हस्तांतरण, ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क के बेहतर समन्वय, 220 केवी और 132 केवी उपकेंद्रों के सुदृढ़ीकरण, नई ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता विकसित करने, बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप नेटवर्क विस्तार, ऊर्जा लेखांकन, स्मार्ट मीटरिंग, मीटर डेटा साझाकरण, रिले समन्वय, नए बे (Bay) निर्माण और आगामी विद्युत परियोजनाओं सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं की विभागवार समीक्षा की गई। जिन मामलों का तत्काल समाधान संभव था, उन पर मौके पर ही निर्णय लिए गए, जबकि शेष मामलों के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित कर आवश्यक निर्देश दिए गए।

प्रबंध निदेशक पी.सी. ध्यानी ने कहा कि यूपीसीएल और पिटकुल राज्य की विद्युत व्यवस्था के दो प्रमुख स्तंभ हैं। दोनों निगमों के बीच बेहतर समन्वय से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं को अधिक विश्वसनीय एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभागीय मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और संवाद एवं समन्वय के माध्यम से त्वरित निर्णय लिए जाएं।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में इस प्रकार की संयुक्त समन्वय बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएं, ताकि विभिन्न स्तरों पर उत्पन्न समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके और दोनों निगमों के बीच कार्य संस्कृति को और मजबूत बनाया जा सके।
बैठक में मौजूद अधिकारियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक और परिणामोन्मुख कदम बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार सभी संबंधित अधिकारी एक मंच पर बैठकर विषयवार चर्चा कर रहे हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनी है।
बैठक में भूमि संबंधी मामलों, विद्युत अवसंरचना विकास, ट्रांसमिशन एवं वितरण नेटवर्क के बेहतर समन्वय, भविष्य की विद्युत मांग, ऊर्जा प्रबंधन और उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दोनों निगमों के बीच नियमित समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी।
