देहरादून में ग्राम्य विकास योजनाओं की बड़ी समीक्षा बैठक, 25 मार्च 2026 तक वार्षिक कार्ययोजना बनाने के निर्देश

देहरादून। सिविल सर्विस इंस्टीट्यूट, देहरादून में ग्राम्य विकास सचिव धीराज गर्ब्याल की अध्यक्षता में प्रदेश के सभी जनपदों के मुख्य विकास अधिकारियों (सीडीओ) के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र व राज्य पोषित ग्राम्य विकास योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए आगामी रणनीति तय की गई।

इन योजनाओं की हुई गहन समीक्षा

बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई), प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम, मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना, मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना तथा बाह्य सहायतित ‘ग्रामोत्थान’ योजना की प्रगति पर चर्चा की गई।

अधिकारियों को श्रम, कौशल विकास और आजीविका सृजन से जुड़ी गतिविधियों पर विशेष फोकस करने के निर्देश दिए गए।

‘लखपति दीदी’ लक्ष्य पर जोर

सचिव गर्ब्याल ने उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत अधिक से अधिक ‘लखपति दीदी’ तैयार करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी सहयोग देने और कृषि आधारित उत्पादों के बेहतर विपणन की दिशा में प्रयास तेज करने के निर्देश दिए।

साथ ही, उत्पादों के लिए एनओपी और एनपीओपी ऑर्गेनिक प्रमाणन प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया।

युवाओं के कौशल और रोजगार पर फोकस

बैठक में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) और डीडीयू-जीकेवाई के तहत युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश दिए गए। सभी जनपदों को स्किल गैप एनालिसिस कर राज्य के भीतर उद्योगों में रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए युवाओं का चिन्हांकन करने को कहा गया।

पलायन रोकने को स्वरोजगार पर बल

मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना की समीक्षा करते हुए सचिव ने स्पष्ट किया कि पलायन रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना अनिवार्य है। विकासखंड स्तर पर वार्षिक लाभार्थियों की सूची तैयार कर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड पर चर्चा

बैठक में हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड के माध्यम से महिला समूहों और किसान उत्पादक संगठनों द्वारा तैयार प्रीमियम उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी विचार किया गया। सचिव ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और बाजार पहुंच को मजबूत कर आय में वृद्धि करना है।

25 मार्च 2026 तक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम योजना और मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत सभी जनपदों को 25 मार्च 2026 तक वार्षिक कार्ययोजनाएं तैयार कर राज्य स्तर पर स्वीकृति के लिए भेजने के निर्देश दिए गए।

बैठक में विभिन्न जनपदों द्वारा प्रस्तुत बेस्ट प्रैक्टिस और सफलता की कहानियों को भी साझा किया गया।

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