पदयात्रा से सियासी हलचल तेज, आंदोलनकारियों ने कहाकृन्याय और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने तक संघर्ष जारी
नई टिहरी। भिलंगना ब्लॉक में लगातार प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं की मौत से आक्रोशित लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा के खिलाफ घनसाली स्वास्थ्य जन संघर्ष मोर्चा ने पीएचसी पिलखी के धरना स्थल से जिलाधिकारी कार्यालय नई टिहरी तक करीब 65 किलोमीटर लंबी पदयात्रा शुरू कर दी है।
बुधवार को मोर्चा के सदस्यों ने बताया कि यह पदयात्रा भिलंगना ब्लॉक की अनीशा रावत, रवीना कठैत, पूरब सिंह और नीतू पंवार जैसी युवतियों और महिलाओं की उन मौतों के खिलाफ न्याय की मांग को लेकर निकाली जा रही है, जिन्हें समय पर उपचार और समुचित स्वास्थ्य सेवाएं न मिलने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इन सभी मौतों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए और जिन लोगों की लापरवाही के कारण मरीजों की जान गई, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि उनकी आर्थिक और मानसिक पीड़ा को कुछ हद तक कम किया जा सके।
उनका कहना है कि भिलंगना ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत लंबे समय से जर्जर है, और कई बार प्रशासन का ध्यान दिलाने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो पाया है।
मोर्चा के लोगों ने यह भी मांग उठाई है कि घनसाली में उप जिला चिकित्सालय की स्थापना जल्द से जल्द की जाए। उनका कहना है कि अगर स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ होतीं, तो इन मौतों को रोका जा सकता था। पदयात्रा गुरुवार शाम को जिलाधिकारी कार्यालय नई टिहरी पहुंचने की उम्मीद है, जहां आंदोलनकारी ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग करेंगे। पदयात्रा में विभिन्न गांवों से आए स्थानीय लोग भी शामिल हो रहे हैं, जो शासन-प्रशासन से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं।
इधर आंदोलन के बीच राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। घनसाली में धरने पर बैठे पूर्व विधायक भीमलाल आर्य ने कहा कि सरकार की उपेक्षा के कारण भिलंगना ब्लॉक के अस्पताल बदहाली की कगार पर पहुंच चुके हैं, जिसकी कीमत आम जनता को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि उप जिला चिकित्सालय की मंजूरी स्वागत योग्य है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने तक लड़ाई जारी रहेगी। इसी तरह आंदोलनकारियों ने भी स्पष्ट किया कि जब तक पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता और स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत नहीं होतीं, संघर्ष जारी रहेगा।
