मोरी/उत्तरकाशी। विकास का कितना भी दावा कर लिया जाए, लेकिन उत्तरकाशी के दुर्गम गांवों की हकीकत आज भी वही है। विकासखंड मोरी के लिवाड़ी गांव में ग्रामीण पिछले 10 सालों से सड़क का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सड़क अब तक गांव तक नहीं पहुंची।
गुरुवार को झमाझम बारिश के बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। गांव के नवीन सिंह की तबीयत अचानक खराब हो गई, तो उन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई वाहन नहीं था। मजबूरन ग्रामीणों को उन्हें कंधे पर उठाकर पैदल, कीचड़ भरे रास्ते से कई किलोमीटर दूर सड़क तक ले जाना पड़ा। तब जाकर उन्हें अस्पताल भेजा जा सका।
2016 से कर रहे हैं मांग
ग्रामीणों का कहना है कि वे साल 2016 से लगातार गांव को सड़क से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। चुनाव आते हैं, नेता वादे करके चले जाते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता। गांव वालों का कहना है – “हमें सड़क चाहिए, आश्वासन नहीं।” किसी के बीमार होने, प्रसव पीड़ा या बुजुर्गों के लिए सड़क तक पहुंचना ही सबसे बड़ी जंग बन जाता है।
विधायक के दावों पर सवाल
पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल जहां प्रदेश की 70 विधानसभाओं के विकास की बात करते हैं, वहीं लिवाड़ी गांव के लोग पूछ रहे हैं कि हमारा नंबर कब आएगा? जब एक मरीज को भी कंधे पर ढोना पड़े तो यह सिर्फ सड़क का मुद्दा नहीं, जीने के अधिकार का सवाल है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द लिवाड़ी गांव को सड़क से जोड़ा जाए, ताकि आपातकाल में किसी की जान न जाए।
