ऊखीमठ। देवभूमि उत्तराखंड में समुद्र तल से करीब 3680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर इन दिनों देश-विदेश के श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पंचकेदारों में तृतीय स्थान रखने वाला यह मंदिर अपनी प्राचीनता और अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने आत्मग्लानि से मुक्ति और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि यहां भगवान शिव की भुजाओं (बाहुओं) की पूजा की जाती है।
पत्थरों की अनूठी स्थापत्य शैली से निर्मित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका जीर्णोद्धार आदि शंकराचार्य ने कराया था। मंदिर के गर्भगृह में विराजमान स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालु गहरी शांति और आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करते हैं।
वर्तमान में ग्रीष्मकालीन यात्रा के दौरान हजारों की संख्या में भक्त कठिन चढ़ाई पार कर बाबा तुंगनाथ के दरबार में पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से पूरी घाटी ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठी है, जिससे क्षेत्र में धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
