उत्तराखंड। पहाड़ों में आखिर कुदरत की इमरजेंसी हट ही गई और इस सीजन की पहली बर्फबारी शुरू हो गई है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी सही साबित हुई है उत्तरकाशी जनपद के गंगोत्री -यमुनोत्री धाम समेत ऊंचाई क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हो गई है। उत्तरकाशी के सभी तहसील क्षेत्रों में तड़के सुबह ही काले बादल मंडरा रहे थे दिन सवा दश बजे से निचले इलाकों में झमाझम बारिश का दौरा शुरू हो गया है। लोग आसमान पर टकटकी लगाए बारिश और बर्फबारी की उम्मीद लगाए बैठे थ।
काश्तकारों में उम्मीद जग गई है कि देर से सही बारिश और बर्फबारी तो हुईं। वहीं जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने ऊंचाई वाले इलाकों में संभावित बर्फबारी को देखते हुए बीआरओ,लोक निर्माण विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। डीएम ने सभी अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए हैं कि स्नोफाल के दौरान सड़कें बंद न हों और किसी भी स्थिति में लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।

बर्फबारी से यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम सहित खरसाली (खुशीमट्ठ), हरकीदून, राडीटॉप, सुक्कीटॉप, हर्षिल घाटी , दयारा, चौरंगी खाल ,पुरोला के आठ गांव सरबडियार, नौगांव के कफनौल, सरनौल, गीठ पट्टी ,तहसील मोरी के गंगाड,फ़ितड़ी, जखोल, कोटगांव, दोणी,गुराडी, नैटवार ,मोरी, टीकोची, भुटाणु, गुराडी
समेत कई प्रमुख पर्यटक स्थलों पर बर्फबारी जारी है, जिससे क्षेत्र में ठंड का प्रकोप बढ़ गया है और सड़कों पर फिसलन की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उपला टकनौर समेत जिले विभिन्न क्षेत्रों दर्जनों सड़कें बंद हो गई है। वहीं सीजन की पहली बर्फबारी से विद्युत विभाग की पौल भी खुल गई है टकनौर क्षेत्र में 11 केवी और राडी घाटी से बडकोट की 33 केवी लाईन का ब्रेकडाउन होने से आधे जिले की बत्ती गुल हो गई है।
गौरतलब है कि इस मौसम में अब तक पहाड़ी इलाके लगभग बर्फ से खाली रहे हैं और मैदानी क्षेत्रों को भी सर्दियों की बारिश नहीं हुई है। बर्फ की कमी इतनी ज्यादा हो चुकी है कि उसकी भरपाई करना अब लगभग नामुमकिन लगता है। वहीं, मैदानी इलाकों पर भी सर्दियों के सूखे (विंटर ड्रॉट) का खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, अब पहाड़ों और मैदानों में एक साथ अच्छी बारिश-बर्फबारी की उम्मीद की एक किरण दिखाई दे रही है, जिससे मुरझाई उम्मीदों को नया जीवन मिला है। लंबे समय से चला आ रहा यह कठिन सूखा दौर (जिंक्स) जल्द टूट सकता है और सामान्य सर्दियों जैसा मौसम लौट सकता है।
