नई टिहरी/उत्तराखंड। राजकीय महाविद्यालय नरेंद्रनगर में “विजन फॉर विकसित भारत 2047” विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन विभिन्न वक्ताओं ने राष्ट्र निर्माण और विकास पर अपने विचार साझा किए।
प्रमुख वक्ताओं के विचार
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के के. के. वर्मा ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत एक हासिल करने योग्य लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने अवस्थापना और गतिशक्ति के क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शुरू कर दी हैं। एसबीआई और रिसर्च इकोरैप 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2027 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाएगा।
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बड़कोट की अंजू भट्ट ने शिक्षा प्रणाली की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 14 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के युवाओं में 25 प्रतिशत आबादी आज भी दूसरी कक्षा की पुस्तक पढ़ने में सक्षम नहीं है। इसलिए विकसित भारत के लिए शिक्षा के क्षेत्र को मजबूत करना और सभी के लिए समावेशी शिक्षा लागू करना अत्यंत आवश्यक है।
ऋषिकेश परिसर के अशोक मैंदोला ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। संगोष्ठी की संरक्षक एवं कार्यक्रम अध्यक्ष प्रणितानंद ने अतिथियों का शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया और अन्नदाता किसानों की भूमिका व उनके लिए विशेष योजनाओं की आवश्यकता पर जोर दिया।
शोध प्रस्तुतियां
संगोष्ठी के दूसरे दिन सात शोधार्थियों ने ऑफलाइन और लगभग सौ शोधार्थियों ने ऑनलाइन माध्यम से अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
-
मसूरी से अरविंद उनियाल
-
सुमित्रा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से निखिल विश्वास कौंग यौंग
-
गढ़वाल विश्वविद्यालय से माधुरी उनियाल
-
दिल्ली विश्वविद्यालय से रेनू कीर
इस सत्र की अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय की अमनदीप कौर और देहरादून की दिव्या वर्मा ने की, जबकि सह-अध्यक्षता नेहा घड़ियाल ने संभाली।
आयोजन
यह संगोष्ठी करियर काउंसलिंग एवं स्किल डेवलपमेंट सेल, वाणिज्य, अर्थशास्त्र और रसायन शास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। इस अवसर पर रश्मि उनियाल, संजय मदान, संजय कुमार, संजय महर और विक्रम सिंह बर्त्वाल सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।
संगोष्ठी ने युवा शोधार्थियों को राष्ट्र निर्माण और समग्र विकास के लिए प्रेरित करने का एक मंच प्रदान किया।
