पारदर्शिता और जवाबदेही से ही संभव है सुशासन सैनिक कल्याण विभाग में हुई गोष्ठी
नई टिहरी। भ्रष्टाचार एक गंभीर सामाजिक व्याधि है जिसने हमारी शासन व्यवस्था और सामाजिक ढांचे में अपनी जड़ें बहुत गहरी जमा ली हैं। एक सभ्य और विकसित समाज के निर्माण के लिए यह हम सभी का नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य है कि हम इस बुराई के खिलाफ एक सशक्त और एकजुट आवाज उठाएं। भ्रष्टाचार को केवल सरकारी तंत्र की कमी मानना उचित नहीं है, बल्कि हमें स्वयं भी यह संकल्प लेना होगा कि हम किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार में न तो सहयोगी बनेंगे और न ही उसे मूकदर्शक बनकर सहेंगे। ये विचार अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टिहरी गढ़वाल के सचिव आलोक राम त्रिपाठी ने व्यक्त किए। जिला सैनिक कल्याण विभाग के सभागार में आयोजित एक विशेष जागरूकता गोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त समाज की परिकल्पना पर जोर दिया।
उत्तराखण्ड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देशों के अनुपालन में और जिला जज एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अमित कुमार सिरोही के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित इस गोष्ठी का मुख्य उद्देश्य लोक सेवकों और आम नागरिकों को भ्रष्टाचार के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था। गोष्ठी के दौरान सचिव आलोक राम त्रिपाठी ने उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों को विस्तार से समझाया कि किस प्रकार पारदर्शिता और लोक प्रशासन में जवाबदेही सुनिश्चित करके भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है। उन्होंने भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों, नियमों, निवारक उपायों और संस्थागत तंत्रों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही यह भी बताया गया कि समाज, शासन, आर्थिक विकास और लोक कल्याणकारी योजनाओं पर भ्रष्टाचार का कितना गहरा और प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जो अंततः देश की प्रगति को बाधित करता है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों को वैश्विक संदर्भ में भी भ्रष्टाचार की स्थिति से अवगत कराया गया। इस दौरान ‘ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल’ द्वारा जारी किए जाने वाले “भ्रष्टाचार बोध सूचकांक” (करप्शन परसेप्शन इंडेक्स) में भारत की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डाला गया। इसके अतिरिक्त, कानूनी पहलुओं को समझाते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के विभिन्न प्रावधानों और इसके तहत मिलने वाले दंड के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की गई। वक्ताओं ने जोर दिया कि कानून की जानकारी ही बचाव का सबसे सशक्त माध्यम है और एक सतर्क नागरिक ही भ्रष्टाचार मुक्त भारत की नींव रख सकता है।
