टिहरी को ओबीसी दर्जा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री से फिर मिलेंगे विधायक किशोर उपाध्याय

नई टिहरी। टिहरी विधानसभा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और इसे नई पहचान दिलाने के लिए चल रहे प्रयासों के बीच विधायक किशोर उपाध्याय ने क्षेत्र की प्रमुख मांगों और भविष्य की योजनाओं पर स्थिति स्पष्ट की है। जिला भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्तर पर प्रत्येक विधानसभा से मांगे गए 10 प्रमुख कार्यों के प्रस्तावों पर गंभीरता से मंथन चल रहा है। इस क्रम में टिहरी विधानसभा को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) श्रेणी में शामिल करने का महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया था। हालांकि, उन्होंने जानकारी दी कि शासन स्तर से फिलहाल इसे संभव नहीं बताया जा रहा है। इसके बावजूद, विधायक ने हार नहीं मानी है और उन्होंने आश्वस्त किया है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर वे शीघ्र ही मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात कर विस्तृत वार्ता करेंगे, ताकि जनता की इस मांग का कोई सकारात्मक हल निकाला जा सके।

 

प्रेस वार्ता के दौरान विधायक उपाध्याय ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि जनपद मुख्यालय के समीप इणियां में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज निर्माण की कार्यवाही संतोषजनक गति से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रदेश से लेकर केंद्र स्तर तक कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि सर्वपक्षीय सहयोग से यह मेडिकल कॉलेज जल्द ही अस्तित्व में आएगा, जिससे पहाड़ के लोगों को बेहतर उपचार मिल सकेगा। इसके अलावा, जिला मुख्यालय पर क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया भी अंतिम चरणों में है। इस यूनिट के लिए प्रदेश सरकार अतिरिक्त 9 करोड़ रुपये की व्यवस्था करने जा रही है, जो स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

 

शिक्षा के क्षेत्र में टिहरी को एक हब के रूप में विकसित करने की योजनाओं का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि रानीचौरी परिसर को फॉरेस्ट्री विश्वविद्यालय के रूप में अपग्रेड करने और हाइड्रो कॉलेज को आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) का हिल कैंपस बनाने की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। हाइड्रो कॉलेज में आईआईटी की कुछ कक्षाएं शुरू भी हो चुकी हैं, और वहां लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बाउंड्री वॉल और सड़क निर्माण का कार्य प्रगति पर है। इसके साथ ही, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय का परिसर जौल गांव में स्थापित करने के लिए भूमि तलाशने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जिला मुख्यालय में लंबे समय से चली आ रही अतिरिक्त भूमि की समस्या के समाधान की दिशा में भी प्रशासन सकारात्मक कदम उठा रहा है।

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