पहाड़ की नारी शक्ति का कमाल, सीमा भंडारी ने गांव में ही खड़ी की स्वरोजगार की मिसाल

 

नई टिहरी। उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में अब मातृशक्ति केवल चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्वरोजगार की नई इबारत लिख रही है। राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि अपने साथ-साथ अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रही हैं।

 

इसी बदलाव की एक सशक्त बानगी टिहरी जिले के चम्बा ब्लॉक स्थित स्युॅटा छोटा गांव में देखने को मिली है, जहां की निवासी सीमा भण्डारी ने अपनी मेहनत और लगन से सफलता की नई कहानी गढ़ी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चल रही योजनाओं ने उनके सपनों को पंख लगाने का काम किया है।

 

सीमा भण्डारी ने अपने गांव में नागराजा स्वयं सहायता समूह का गठन कर सामूहिक विकास की नींव रखी। वर्ष 2018 में समूह के अस्तित्व में आने के बाद उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से न केवल प्रशिक्षण मिला, बल्कि सही दिशा-निर्देश भी प्राप्त हुए। स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए उन्होंने वर्ष 2023 में आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) से मशरूम उत्पादन का विधिवत प्रशिक्षण लिया। उनकी मेहनत रंग लाई और महज तीन महीने के भीतर ही उन्होंने मशरूम उत्पादन से 15,000 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो तो गांव में रहकर भी अच्छी आजीविका कमाई जा सकती है।

 

सीमा के प्रयासों को विस्तार देने में कृषि विभाग की “3-के ऑर्गेनिक आउटलेट योजना” ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभाग की ओर से उन्हें आउटलेट संचालित करने के लिए रैक, इलेक्ट्रॉनिक तराजू और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए। आज सीमा और उनके समूह की महिलाएं इस आउटलेट के माध्यम से स्थानीय स्तर पर उत्पादित दाल, अचार, राजमा, औषधीय गुणों से भरपूर कैमोमाइल चाय और मशरूम जैसे ऑर्गेनिक उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। इतना ही नहीं, अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तृत रूप देने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत 5 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर एक स्टोर और उत्पाद संग्रहण केंद्र का निर्माण भी किया है, जिससे उत्पादों के रखरखाव और विपणन में आसानी हो रही है।

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