रुड़की। मानसून के दौरान संभावित बाढ़ जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर (बीईजी एंड सेंटर), रुड़की ने शुक्रवार को हरिद्वार जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय (डीडीएमओ) के साथ संयुक्त बाढ़ राहत एवं बचाव अभ्यास आयोजित किया। यह अभ्यास अपर गंगा नहर स्थित ‘वेट ब्रिजिंग ट्रेनिंग एरिया’ में किया गया, जिसमें विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया गया।
अभ्यास में डीडीएमओ हरिद्वार, 40वीं पीएसी बटालियन, एसडीआरएफ उत्तराखंड, मिलिट्री हॉस्पिटल रुड़की और बीईजी एंड सेंटर के कुल 110 अधिकारियों एवं जवानों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य आपदा की स्थिति में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (एचएडीआर) संचालन की तैयारियों को मजबूत करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत में सभी सहभागी एजेंसियों ने अपनी-अपनी राहत एवं बचाव क्षमताओं, जिम्मेदारियों, विशेष उपकरणों और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली की जानकारी साझा की। इससे बाढ़ जैसी परिस्थितियों में नागरिक और सैन्य एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
अभ्यास का मुख्य आकर्षण लाइव रेस्क्यू डेमो रहा। इसमें बचाव नाव की सहायता से डूबते व्यक्ति को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार, बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस), कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) और घायल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान समयबद्ध कार्रवाई और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया गया।
इस संयुक्त अभ्यास में बीईजी एंड सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सेना के 18 नव नियुक्त अधिकारियों ने भी भाग लिया। उन्हें आपदा प्रबंधन प्रणाली, नागरिक प्रशासन के साथ समन्वय और बाढ़ राहत अभियानों में नेतृत्व की भूमिका का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
सेना और नागरिक एजेंसियों ने कहा कि इस तरह के संयुक्त अभ्यास प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित, प्रभावी और समन्वित राहत एवं बचाव अभियान सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह अभ्यास नागरिक-सैन्य सहयोग और आपदा प्रबंधन तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
