उत्तरकाशी। शिवनगरी उत्तरकाशी स्थित प्राचीन भगवान गोपेश्वर मंदिर में श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित होने वाली 11 दिवसीय शिवमहापुराण कथा का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। धार्मिक अनुष्ठानों, वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं के जयघोष के बीच निकाली गई मंगल कलश यात्रा से पूरा नगर भक्तिमय हो उठा।
मंगल कलश यात्रा भगवान गोपेश्वर मंदिर परिसर से शुरू हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं और भक्तों ने सिर पर मंगल कलश धारण कर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मणिकर्णिका घाट पहुंचकर मां भागीरथी से गंगाजल भरा। इसके बाद भगवान कंडार देवता की पावन पालकी की सानिध्यता में यात्रा भैरव चौक होते हुए कथा स्थल पहुंची। इस दौरान “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोषों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
वैदिक विधि-विधान से हुआ कथा का शुभारंभ
कथा स्थल पर पहुंचने के बाद विधिवत मंडप पूजन, देव पूजन और प्रवेश अनुष्ठान संपन्न किए गए। आचार्यों द्वारा वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर शिवमहापुराण कथा का शुभारंभ कराया गया।
कथा व्यास पंडित महामाया प्रसाद शास्त्री ने प्रथम दिवस की कथा में शिवमहापुराण के महात्म्य का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इस महीने में शिवमहापुराण का श्रवण, रुद्राभिषेक, व्रत एवं उपवास करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
उन्होंने कहा कि शिवमहापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सदाचार, संयम, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखाने वाला महान ग्रंथ है। इसके श्रवण से मनुष्य को मानसिक शांति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
11 दिनों तक चलेगी कथा
प्रथम दिवस की कथा में भगवान शिव की महिमा, शिवभक्ति के महत्व और श्रावण मास में किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और युवा शामिल हुए।
आयोजन समिति के अनुसार शिवमहापुराण कथा आगामी 11 दिनों तक प्रतिदिन आयोजित होगी। इस दौरान भगवान शिव के स्वरूप, लीलाओं और सनातन संस्कृति से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा। कथा के समापन अवसर पर विशाल भंडारे और पूर्णाहुति कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
