IT पार्क को फ्लैश फ्लड से मिलेगी राहत, बनेगा एकीकृत बाढ़ शमन प्लान, सिंचाई विभाग की हाइड्रोलॉजिक सर्वे रिपोर्ट तैयार, सहस्रधारा हेलीपैड क्षेत्र में बनेंगे प्राकृतिक चेकडैम

 

देहरादून। देहरादून के आईटी पार्क क्षेत्र में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव और अचानक आने वाली फ्लैश फ्लड की समस्या से जल्द निजात मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन ने सिंचाई विभाग के माध्यम से क्षेत्र का विस्तृत हाइड्रोलॉजिक सर्वेक्षण कराते हुए ‘एकीकृत बाढ़ शमन योजना’ (Integrated Flood Mitigation Plan) तैयार कर ली है। योजना की डीपीआर स्वीकृत होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

 

शनिवार को ऋषिपर्णा सभागार में रायपुर विधायक उमेश शर्मा (काऊ) और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की मौजूदगी में आयोजित बैठक में एनआईवीवी कंसलटेंसी सर्विसेज ने हाइड्रोलॉजिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत की।

शहरीकरण और ढलान से बढ़ी बाढ़ की समस्या

 

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार देहरादून के पूर्वी हिस्से में स्थित आईटी पार्क क्षेत्र करीब 4.91 किलोमीटर के ऊंचे जलग्रहण क्षेत्र से प्रभावित है। पहाड़ी क्षेत्रों से तेज गति से आने वाला पानी यहां एकत्र हो जाता है। तेजी से हुए शहरीकरण और पक्के निर्माणों के कारण पानी जमीन में समाहित नहीं हो पाता, जिससे क्षेत्र में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

 

रिपोर्ट में बताया गया कि मौजूदा भूमिगत जल निकासी व्यवस्था भारी बारिश के दौरान आने वाले पानी के दबाव को संभालने में पर्याप्त साबित नहीं हो रही है।

 

सहस्रधारा हेलीपैड के पास बनेंगे प्राकृतिक चेकडैम

 

हाइड्रोलॉजिक सर्वेक्षण में बाढ़ नियंत्रण के लिए कई वैज्ञानिक उपाय सुझाए गए हैं। इसके तहत सहस्रधारा हेलीपैड से नीचे की ओर करीब 1.2 किलोमीटर क्षेत्र में प्राकृतिक चेकडैमों की श्रृंखला विकसित की जाएगी। इनसे पानी के तेज बहाव और पीक फ्लो को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में जल संरक्षण के उपाय किए जाएंगे। नदियों और बरसाती नालों के किनारों को तकनीकी रूप से विकसित कर जल प्रवाह को बेहतर बनाने की योजना भी शामिल है।

 

डीपीआर स्वीकृत होते ही शुरू होंगे सुरक्षात्मक कार्य

 

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कहा कि तेज बारिश के दौरान आईटी पार्क क्षेत्र में सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित होता है और सार्वजनिक संपत्ति के साथ ही व्यावसायिक गतिविधियों को भी नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग के माध्यम से प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। डीपीआर स्वीकृत होते ही सुरक्षात्मक कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

 

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, उप जिलाधिकारी सदर अपूर्वा सिंह, सिंचाई विभाग के वरिष्ठ इंजीनियर और कंसलटेंसी के अधिकारी मौजूद रहे।

 

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