स्थानीय उत्पादों को नई पहचान देने के लिए मुनिकीरेती में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन
टिहरी। सोमवार को पूर्णानंद स्टेडियम, मुनिकीरेती में एक भव्य क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह सम्मेलन सी.एल.एफ. (क्लस्टर लेवल फेडरेशन) की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा देने और स्थानीय उत्पादों के विपणन के अवसरों को बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 25 प्रतिष्ठित क्रेताओं ने भाग लिया, जिन्होंने अपनी-अपनी फर्मों की जानकारी साझा करते हुए उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के पहलुओं पर स्थानीय विक्रेताओं को मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने देशभर से आए क्रेताओं का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह मंच न केवल विक्रेताओं को अपने उत्पाद प्रदर्शित करने का अवसर देता है, बल्कि उन्हें बड़े ऑर्डर प्राप्त करने और अपने व्यवसाय को विस्तार देने का माध्यम भी बनेगा। उन्होंने सभी क्रेताओं से स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हुए कहा कि उत्तराखंड की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और प्राकृतिक उत्पादों को देश-विदेश में पहचान दिलाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
नोएडा से आए अभिषेक ने बताया कि उनकी फर्म ‘यू टर्न फॉर नेचर’ पिछले पांच वर्षों से महिलाओं द्वारा बनाए गए उत्पादों की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम महिलाओं की समस्याओं को समझकर उनके साथ समाधान साझा कर रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है।
भोपाल से आई आकांक्षा ने बताया कि वह मार्केटिंग लिंक के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार में सहायता कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी संस्था उत्तराखंड से शुद्ध शहद की खरीद कर रही है, जिसकी गुणवत्ता देशभर में सराही जा रही है। गौरव ने बताया कि उनकी फर्म स्टील डेवलपमेंट पर काम कर रही है और जिला प्रशासन द्वारा क्रेता-विक्रेता सम्मेलन जैसे मंच उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।
शिवम ने बताया कि उनकी फर्म कृषि क्षेत्र में नई तकनीकें लाने पर कार्यरत है, जिससे किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और लागत घटाने में मदद मिल रही है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम मिट्टी की जांच, कीट प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों पर काम कर रही है ताकि ग्रामीण उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थान मिल सके।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ से आई जाहनवी शाह ने हर्बल टी के क्षेत्र में अपने कार्यों का परिचय दिया, जबकि दीपक वनियाल ने मशरूम, बुरांश और बेडू उत्पादों पर हो रहे प्रयास साझा किए। फलक ने आयुर्वेदिक उत्पादों पर, धीरेंद्र ने फार्मिंग ऑफ प्लांट्स पर, शिखा ने लैवेंडर और एरोमेटिक पौधों पर अपने कार्यों की जानकारी दी। सचिन ने ग्राम उद्योगों की पैकेजिंग और विपणन संबंधी समस्याओं के समाधान पर बात की। पवित्र जोशी ने नेटल और हेंप की सप्लाई चेन तथा निर्माण प्रक्रिया के बारे में बताया, जबकि रमन शैली ने सुझाव दिया कि सभी पहाड़ी उत्पादों को एक ही स्थान पर प्रदर्शित और बेचा जाए ताकि पर्यटक उत्तराखंड का कोई न कोई उत्पाद अवश्य खरीदें।
