आदर्श ग्राम की परिकल्पना से ही सशक्त और आत्मनिर्भर बनेगा भारत, प्रतिनिधियों को निभानी होगी अहम भूमिका

नई टिहरी। बौराड़ी में उत्तरांचल उत्थान परिषद के तत्वाधान में एक भव्य “युवा पंचायत जन प्रतिनिधि सम्मेलन” का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण विकास और सामाजिक समरसता को लेकर गहन मंथन हुआ। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गांवों को आदर्श स्वरूप प्रदान करना और स्थानीय संस्कृति व परंपराओं के संरक्षण के साथ विकास की नई इबारत लिखना रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि गांवों की प्रगति में ही देश की उन्नति निहित है और इसके लिए जन प्रतिनिधियों को एक सजग प्रहरी की भूमिका निभानी होगी। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि वन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल, मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र और जिला पंचायत अध्यक्ष इशिता सजवाण ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

 

वन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने संबोधन में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता को लेकर प्रतिनिधियों को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पॉलिथीन का बढ़ता उपयोग और जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हर जन प्रतिनिधि को इसकी शुरुआत स्वयं से करनी होगी। मंत्री ने जोर देकर कहा कि गांवों के रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकें और सफाई व्यवस्था में ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग लें। उनका कहना था कि जब हर प्रतिनिधि अपने गांव और क्षेत्र को आदर्श बनाने की परिकल्पना के साथ कार्य करेगा, तभी भारत एक स्वावलंबी, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनकर विश्व गुरु के रूप में स्थापित हो सकेगा। उन्होंने प्रतिनिधियों को गांव की आर्थिकी को मजबूत करने और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर भी गंभीरता से कार्य करने की सलाह दी।

 

मुख्य वक्ता और आरएसएस के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र ने संगठन के सेवा कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संघ विद्या भारती के माध्यम से संस्कारवान शिक्षा और विभिन्न प्रकल्पों के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रहा है। उन्होंने केदारनाथ और पिथौरागढ़ जैसे दुर्गम स्थानों पर स्थापित अस्पतालों का उदाहरण देते हुए कहा कि समाज सेवा ही संगठन का मूल ध्येय है। उन्होंने उत्तरांचल उत्थान परिषद द्वारा शिक्षा और स्वावलंबन के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। डॉ. शैलेंद्र ने उपस्थित जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें विकास के लिए केवल सरकार पर आश्रित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने स्तर पर छोटे-छोटे सामूहिक प्रयासों से समाज हित में योगदान देना चाहिए।

 

 

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