कोटी-डोबरा पर्यटन मार्ग के मुआवजा मसले पर काश्तकारों ने रखी प्रमुख मांगें
भू-अर्जन, मुआवजा और एडीबी पॉलिसी को लेकर काश्तकार प्रतिनिधियों संग जिलाधिकारी ने की विस्तृत वार्ता
नई टिहरी। कोटी कॉलोनी-डोबरा चांठी पर्यटन रोड निर्माण से प्रभावित काश्तकारों की समस्याओं और उनकी मांगों को समझने के उद्देश्य से जिलाधिकारी नितिका खंडेलवाल ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में पर्यटन रोड निर्माण, भू-अर्जन मुआवजा, रेट निर्धारण और अन्य विवादित मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने काश्तकारों द्वारा उठाए गए बिंदुओं को धैर्यपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि प्रशासन उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के साथ निपटाते हुए उनके हित में सकारात्मक और व्यवहारिक निर्णय लेगा।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी परियोजना पर कार्य केवल आपसी सहमति या भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत ही किया जाता है। उन्होंने अधिनियम में वर्णित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया, परिसंपत्तियों के क्षति मुआवजा, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (आर एंड आर) नीति से मिलने वाली सुविधाएं, प्रभावित परिवारों को दिए जाने वाले एकमुश्त भुगतान तथा कुटुंब की परिभाषा जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी विस्तार से दी। इसके साथ ही उन्होंने एडीबी द्वारा निर्धारित नीतियों और उन नीतियों के अंतर्गत दी जाने वाली विभिन्न सुविधाओं के बारे में भी काश्तकारों को अवगत कराया।
बैठक के दौरान प्रभावित काश्तकारों ने अपनी कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें भवन क्षति का मुआवजा व्यवसायिक दरों पर देने, जाख क्षेत्र में 50 बोटिंग लाइसेंस उपलब्ध कराने, जाख से कोटी कॉलोनी तक बनने वाले व्यूपॉइंट क्षेत्र में स्थानीय लोगों को दुकानों के लिए स्थान आवंटित करने, होमस्टे को व्यवसायिक श्रेणी में शामिल करने तथा कट-ऑफ डेट में संशोधन करने जैसी प्रमुख मांगें शामिल रहीं। काश्तकारों ने कहा कि पर्यटन रोड बनने से क्षेत्र की संभावनाएं बढ़ेंगी, लेकिन इसके साथ ही स्थानीय लोगों के हितों की सुरक्षा तथा उनका आर्थिक-सामाजिक पुनर्वास भी उतना ही आवश्यक है।
