Your Website Description

गढ़वाल विश्वविद्यालय की डॉ. दीप्ति सेमवाल को यूकॉस्ट का यंग साइंटिस्ट अवार्ड, जैव विविधता संरक्षण पर शोध को मिली पहचान

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत डॉ. दीप्ति सेमवाल ने अपनी शोध उपलब्धि से उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से आयोजित 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन (यूएसएसटीसी-2026) में उन्हें प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें यह पुरस्कार पृथ्वी विज्ञान संकाय के अंतर्गत जैव विविधता संरक्षण से जुड़े विषय पर उत्कृष्ट शोध प्रस्तुति के लिए प्रदान किया गया।

25 और 26 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए शोधार्थियों और वैज्ञानिकों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। डॉ. सेमवाल ने अपने शोध विषय ‘जैविक संसाधनों का स्थानिक वितरण एवं सामुदायिक सहभागिता’ के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के अध्ययन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखा। उनकी शोध प्रस्तुति को विशेषज्ञों ने सराहा और उन्हें यंग साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया।

डॉ. सेमवाल की यह उपलब्धि गढ़वाल विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। साथ ही, यह उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शोध एवं विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ रही युवा प्रतिभाओं की क्षमता को भी रेखांकित करती है।

पृथ्वी विज्ञान संकाय में उत्कृष्ट शोध प्रस्तुति के लिए मिला सम्मान

यूएसएसटीसी-2026 में पृथ्वी विज्ञान संकाय के अंतर्गत विभिन्न विषयों से संबंधित शोध प्रस्तुतियां शामिल थीं। इनमें भूगोल, भूविज्ञान, भू-आकृति विज्ञान, हिमनद भू-आकृति विज्ञान और भूभौतिकी सहित कई विषयों पर शोध कार्य प्रस्तुत किए गए।

इसी संकाय के अंतर्गत डॉ. दीप्ति सेमवाल ने जैव विविधता संरक्षण से जुड़े अपने शोध विषय पर प्रस्तुति दी। उनका शोध जैविक संसाधनों के स्थानिक वितरण और इनके संरक्षण में सामुदायिक सहभागिता की भूमिका पर केंद्रित रहा। प्राकृतिक संसाधनों के अध्ययन और उनके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी का महत्व पर्वतीय क्षेत्रों के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है।

सम्मेलन में शोध प्रस्तुतियों के मूल्यांकन के लिए विशेषज्ञ पैनल गठित किया गया था। इसमें प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रो. हरीश कर्नाटक, प्रो. कमल पांडे, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस) से जुड़े वैज्ञानिकों तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों ने विशेषज्ञ के रूप में भाग लिया। विशेषज्ञों ने विभिन्न शोध प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।

गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की पीएचडी, जैव-भूगोल में किया शोध

डॉ. दीप्ति सेमवाल ने भूगोल विषय में अपनी पीएचडी हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय से पूरी की है। उनका शोध जैव-भूगोल के क्षेत्र में रहा। उन्होंने ‘Biogeographical Regionalization of Garhwal Region’ विषय पर प्रो. मोहन सिंह पंवार के निर्देशन में शोध कार्य किया।

जैव-भूगोल के अंतर्गत किसी क्षेत्र में जीव-जंतुओं, वनस्पतियों और जैविक संसाधनों के वितरण तथा उनके भौगोलिक परिवेश के साथ संबंधों का अध्ययन किया जाता है। गढ़वाल जैसे पर्वतीय क्षेत्र में भौगोलिक विविधता, प्राकृतिक परिस्थितियों और जैविक संसाधनों के अध्ययन का विशेष महत्व है। डॉ. सेमवाल का शैक्षणिक और शोध कार्य इसी क्षेत्र से जुड़ा रहा है।

रुद्रप्रयाग के सुदूर गांव उथिंड से वैज्ञानिक उपलब्धि तक का सफर

डॉ. दीप्ति सेमवाल मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के सुदूरवर्ती गांव उथिंड की रहने वाली हैं। पर्वतीय क्षेत्र से निकलकर उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित करना उनकी उपलब्धि को खास बनाता है।

यूकॉस्ट जैसे राज्यस्तरीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन में यंग साइंटिस्ट अवार्ड प्राप्त करना उनके शोध कार्य को मिली महत्वपूर्ण पहचान है। उनकी सफलता से पर्वतीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों को विज्ञान, पर्यावरण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े विषयों में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सकती है।

सम्मेलन में 261 शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोधपत्र

यूएसएसटीसी-2026 में शोध के प्रति व्यापक उत्साह देखने को मिला। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दो दिवसीय सम्मेलन की विभिन्न श्रेणियों में कुल 261 प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इनमें 165 महिला और 96 पुरुष शोधार्थी शामिल रहे।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न श्रेणियों में कुल 36 यंग साइंटिस्ट अवार्ड प्रदान किए गए। इनमें 16 महिला शोधार्थियों और 20 पुरुष शोधार्थियों को उत्कृष्ट शोध प्रस्तुतियों के लिए सम्मानित किया गया।

यह आंकड़े विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवा शोधकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाते हैं। विशेष रूप से महिला शोधार्थियों की भागीदारी और उपलब्धियां विज्ञान के क्षेत्र में उनकी बढ़ती उपस्थिति को रेखांकित करती हैं।

विश्वविद्यालय परिवार ने दी बधाई

डॉ. दीप्ति सेमवाल को यंग साइंटिस्ट अवार्ड मिलने पर विश्वविद्यालय परिवार ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उनकी उपलब्धि को शोध और अकादमिक क्षेत्र में विश्वविद्यालय के लिए सम्मानजनक माना जा रहा है।

डॉ. सेमवाल का सम्मान यह संदेश भी देता है कि स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, जैविक संसाधनों और सामुदायिक सहभागिता जैसे विषयों पर किया गया शोध पर्यावरण संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनकी उपलब्धि युवा शोधार्थियों, विशेषकर महिला वैज्ञानिकों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए शोध करने और समाजोपयोगी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *