120 साल पुरानी गलोगी परियोजना के संरक्षण पर जोर, नियामक आयोग ने किया स्थलीय निरीक्षण

देहरादून। उत्तराखंड की ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल 3.5 मेगावाट क्षमता वाली गलोगी लघु जलविद्युत परियोजना का बुधवार को उत्तराखंड विद्युत विनियामक आयोग की टीम ने विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आयोग ने परियोजना में चल रहे नवीनीकरण, आधुनिकीकरण एवं पुनरोद्धार (RMU) कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए परियोजना के संरक्षण और सुरक्षा से जुड़े कार्यों को शीघ्र पूरा करने पर बल दिया।

आयोग के अध्यक्ष एम.एल. प्रसाद के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के विद्युत गृह, हेडवर्क्स, पेनस्टॉक और अन्य तकनीकी संरचनाओं का निरीक्षण कर संचालन व्यवस्था की समीक्षा की। इस दौरान यूजेवीएन लिमिटेड के अधिकारियों ने परियोजना की वर्तमान स्थिति, तकनीकी उन्नयन और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी।

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि गलोगी परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि देहरादून शहर की पेयजल आपूर्ति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसे देखते हुए परियोजना में विद्युत और पेयजल प्रणालियों के बेहतर संचालन के लिए अत्याधुनिक एकीकृत SCADA प्रणाली स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

लगभग 120 वर्ष पुरानी इस परियोजना के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए आयोग ने इसके धरोहर स्वरूप को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि RMU कार्यों पर हुए निवेश के आधार पर टैरिफ संशोधन का प्रस्ताव आयोग के समक्ष विचाराधीन है, जिससे भविष्य में आवश्यक सुधार और संरक्षण कार्यों को गति मिल सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग का यह निरीक्षण न केवल परियोजना की तकनीकी दक्षता के मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके दीर्घकालिक संरक्षण, वित्तीय स्थिरता और बेहतर संचालन की दिशा में भी एक अहम पहल साबित होगा।

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