उत्तरकाशी : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यमुना जी के खरशाली गांव में शीतकालीन यात्रा का शुभारंभ करके शनिवार को उत्तरकशी पहुंचे है। रविवार को शंकराचार्य गंगा जी के शीतकालीन मुखवा गांव पहुंच कर शीतकालीन गंदी स्थल पर पूजा अर्चना कर देश दुनिया के श्रद्धालुओं को शीतकालीन यात्रा के लिए संदेश देंगे।
इस दौरान उन्होंने बाबा विश्वनाथ मंदिर के दर्शन किया और स्थानीय लोगों ने शंकराचार्य का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भव्य स्वागत किया गया।यात्रा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को संबधित करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से देवभूमि और संत-महात्माओं की तपस्थली रही है।
उन्होंने कहा कि चारधामों में प्राचीन परंपरा अनुसार छह महीने देवता स्वयं पूजा स्वीकार करते हैं और छह महीने मानव द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धामों में कपाट बंद होने के बाद पूजा बंद होने की जो गलत धारणा लोगों में बनी है, वह सही नहीं है।
शीतकालीन पूजा स्थलों में भी उन्हीं देवताओं की विधिवत पूजाहोती है, और यहां दर्शन करने से ग्रीष्मकालीन धामों के समान ही पुण्य फल प्राप्त होता है।
शंकराचार्य ने कहा कि शीतकालीन यात्रा का उद्देश्य लोगों में यह संदेश पहुँचाना है कि धार्मिक परंपराओं एवं भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पूजा स्थलों का परिवर्तन अनादिकाल से होता आया है ।
