विकासनगर/देहरादून। उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में पारंपरिक पांइता पर्व दशहरा उत्सव के रूप में हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। अपनी अनूठी संस्कृति, समृद्ध लोक परंपराओं और विशिष्ट रीति-रिवाजों के लिए देश-दुनिया में पहचान रखने वाले इस क्षेत्र में पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। पर्व के अवसर पर उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज भी जौनसार-बावर पहुंचे। उन्होंने सीमोग स्थित शिरगुल महाराज मंदिर में पूजा-अर्चना कर देवता के दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

शिरगुल महाराज मंदिर में उमड़े श्रद्धालु
मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज कोटी पहुंचे। यहां उन्होंने दशहरा पर्व के अवसर पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाते हुए प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया।
जौनसार-बावर क्षेत्र में पांइता पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस अवसर पर जौनसार-बावर के अलावा हिमाचल प्रदेश, विकासनगर और देहरादून सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सीमोग स्थित शिरगुल महाराज मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, शिरगुल महाराज के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। यही वजह है कि पर्व के दौरान मंदिर परिसर में भक्तों की विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है।
पारंपरिक पर्व के साथ खेल प्रतिभाओं को मिल रहा मंच
पांइता पर्व के अवसर पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिताएं ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती हैं। इस संबंध में श्रीचंद शर्मा ने कहा कि जौनसार-बावर क्षेत्र के चार प्रमुख त्योहारों में पांइता पर्व का विशेष स्थान है। इस दौरान दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु देव दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे स्थानीय खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलता है।
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है पांइता पर्व
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का जौनसार-बावर आगमन और शिरगुल महाराज मंदिर में दर्शन क्षेत्र की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति आस्था का प्रतीक रहा। वहीं, कोटी में आयोजित खेलकूद प्रतियोगिताओं ने पर्व के उत्साह को और बढ़ाया।
पांइता पर्व ने एक बार फिर जौनसार-बावर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और सामुदायिक एकता की झलक प्रस्तुत की। पारंपरिक रीति-रिवाजों, देव आस्था और खेल गतिविधियों के संगम ने इस पर्व को क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष बना दिया।
