रूद्रप्रयाग। धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और नारी-शक्ति का अद्भुत संगम इन दिनों अगस्त्यमुनि में देखने को मिल रहा है, जहां हिमालयन वीरांगना संस्था के तत्वावधान में महिलाओं द्वारा आयोजित भव्य श्रीरामलीला पूरे क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह आयोजन अब केवल रामकथा का मंचन भर नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपराओं के संरक्षण का प्रेरणादायी अभियान बन चुका है।

रामलीला के द्वितीय दिवस पर मंचित ताड़का वध एवं अहिल्या तारण लीला ने उपस्थित श्रद्धालुओं और दर्शकों को गहरे भावों से जोड़ दिया। कलाकारों के सजीव अभिनय, प्रभावशाली संवाद और भक्तिमय प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को राममय बना दिया। देर रात तक दर्शक मंत्रमुग्ध होकर मंचन का आनंद लेते रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विश्व मंगलम् समिति के अध्यक्ष हर्षवर्द्धन बेंजवाल, व्यापार मंडल अगस्त्यमुनि के अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह नेगी तथा विशिष्ट अतिथियों शशिधर सेमवाल, गंगाराम सकलानी, चन्द्र सिंह नेगी, देवी प्रसाद भट्ट, विक्रम सिंह नेगी सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं भगवान श्रीहरि की आरती के साथ किया गया। संस्था की कोषाध्यक्ष कुसुम भट्ट ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम का संचालन किया।

इसके पश्चात भगवान विष्णु की आरती के साथ रामलीला का मंचन आरम्भ हुआ। मंचित प्रसंगों में मिथिला दरबार, अनावृष्टि से व्यथित प्रजा, राजा जनक द्वारा स्वर्ण हल चलाना, माता सीता का अवतरण, विश्वामित्र यज्ञ, दशरथ दरबार, राम-लक्ष्मण का वनगमन, ताड़का वध, मारीच-सुबाहु प्रसंग तथा अहिल्या उद्धार जैसे दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मंच पर कलाकारों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और संवाद अदायगी ने दर्शकों को त्रेतायुग की दिव्यता का साक्षात अनुभव कराया।

मुख्य अतिथि हर्षवर्द्धन बेंजवाल ने कहा कि महिलाओं द्वारा इस प्रकार की दिव्य रामलीला का मंचन समाज में सांस्कृतिक चेतना और भारतीय संस्कारों को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है। वहीं व्यापार मंडल अध्यक्ष त्रिभुवन सिंह नेगी ने कहा कि अगस्त्यमुनि की महिला रामलीला आज पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा निभाए जा रहे पात्र नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।

रामलीला में  शिवानी भट्ट ने श्रीराम, सृष्टि कठैत ने लक्ष्मण, अनीता राणा ने राजा दशरथ,  रामेश्वरी बुटोला ने राजा जनक तथा अनीता चौधरी ने ताड़का की भूमिका का प्रभावशाली मंचन किया। वहीं अनिता रावत ने विश्वामित्र और सत्येश्वरी रौथाण ने वशिष्ठ की भूमिका को जीवंत बना दिया।

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