बौराड़ी में सीटू के नौवें राज्य सम्मेलन का भव्य आगाज, पलायन और रोजगार के मुद्दे पर श्रमिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

उत्तराखंड। पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में श्रमिक वर्ग की आवाज को बुलंद करने और मेहनतकश तबके के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) का नौवां द्विवार्षिक राज्य सम्मेलन टिहरी गढ़वाल के बौराड़ी में पूरे जोश और उत्साह के साथ शुरू हुआ। सम्मेलन का आगाज एक विशाल और प्रभावशाली रैली के साथ हुआ, जिसने शहर के माहौल को आंदोलित कर दिया।

 

सीटू के 184 समर्पित सदस्यों ने हाथों में लाल झंडे थामकर कम्युनिटी हॉल से रैली निकाली, जो साईं चौक होते हुए ऐतिहासिक गणेश चौक तक पहुंची। इस दौरान श्इंकलाब जिंदाबादश् और मजदूर एकता के गगनभेदी नारों से पूरा शहर गूंज उठा। रैली के पश्चात गणेश चौक पर एक विशाल आम सभा का आयोजन किया गया, जहां श्रमिक नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर हुंकार भरी और मेहनतकश वर्ग की एकजुटता का सशक्त संदेश दिया।

आम सभा को संबोधित करते हुए सीटू के केंद्रीय सचिव डा. कश्मीर सिंह ठाकुर ने देश और प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड के गाड़-गदेरों से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों तक पलायन एक नासूर बन चुका है। आम जनता अपनी जड़ों, गांव और घरों को छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर है, क्योंकि सरकारें उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक मुहैया कराने में पूरी तरह विफल साबित हुई हैं।

जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार की दरकार थी, लेकिन विडंबना यह है कि सत्ता में बैठी भाजपा सरकार न तो अस्पताल चला पा रही है और न ही स्कूलों की स्थिति सुधार पा रही है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक तरफ सरकार अपने चहेते कॉर्पाेरेट मित्रों के लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ कर रही है, तो दूसरी तरफ दिन-रात मेहनत करने वाली आशा कार्यकर्ता, भोजन माताएं और मिड-डे मील कर्मी जब अपने मानदेय में मामूली बढ़ोतरी की मांग करती हैं, तो सरकार फंड की कमी का रोना रोती है। सरकार का यह दोहरा चरित्र अब जनता के सामने पूरी तरह बेनकाब हो चुका है, जो सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने की साजिश रच रही है।

सीटू के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड राजेंद्र सिंह नेगी ने अपने संबोधन की शुरुआत टिहरी की ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए की। उन्होंने दादा दौलतराम, मोलू भरदारी, श्रीदेव सुमन और नागेंद्र सकलानी जैसे महान शहीद क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि टिहरी की यह माटी क्रांतिकारियों के रक्त से सींची गई है। इसी पावन धरती पर आयोजित हो रहा यह सम्मेलन कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और संघर्ष की प्रतिबद्धता का संचार करेगा। नेगी ने केंद्र की मोदी सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का गंभीर आरोप लगाया।

 

उन्होंने कहा कि हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वादा करके सत्ता में आई सरकार आज बची-खुची सरकारी नौकरियों को भी ठेका प्रथा और कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम की भेंट चढ़ा रही है। सरकार लोकतांत्रिक आंदोलनों को कुचलने का प्रयास कर रही है और धर्म की आड़ में आम जनता का ध्यान रोटी, कपड़ा, मकान और रोजगार जैसे असल मुद्दों से भटका रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार केवल भ्रम फैलाने और जुमलेबाजी का काम कर रही है।

राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर प्रहार करते हुए सीटू के राज्य सचिव कामरेड गुणानंद जखमोला ने धामी सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने प्रदेश में लगातार हो रहे भर्ती घोटालों और पेपर लीक प्रकरणों पर सरकार की कथित श्जीरो टॉलरेंसश् नीति को छलावा बताया। जखमोला ने कहा कि बार-बार पेपर लीक होना युवाओं के सपनों और भविष्य पर कुठाराघात है।

 

उन्होंने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की बदहाली, बढ़ती बेरोजगारी और ठेका प्रथा के खिलाफ मजदूर, किसान और युवाओं को एक साझा मंच पर आकर निर्णायक लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। आम सभा का संचालन और अध्यक्षता कामरेड चिंतामणि थपलियाल ने की। कार्यक्रम के दौरान कामरेड राजपाल सिंह ने अपनी ओजस्वी कविता के माध्यम से मेहनतकश जनता के संघर्ष, पीड़ा और आशाओं को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया, जिसने सभा में एक राजनीतिक-सांस्कृतिक चेतना का संचार किया।

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