बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वस्थ भविष्य पर विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण विचार
एनसीपीसीआर ने बतायाः 26 हजार मामलों का निस्तारण, 23 सौ बच्चों को तस्करी से बचाया
नई टिहरी। चम्बा बादशाहीथौल में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण टिहरी गढ़वाल के संयुक्त तत्वावधान में बाल अधिकारों से संबंधित एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और संपूर्ण विकास को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाना और संस्थागत पहल को मजबूत करना रहा। जिलाधिकारी नितिका खंडवाल ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया, जिसके बाद विचार-विमर्श का विस्तृत सत्र प्रारंभ हुआ।
मुख्य विकास अधिकारी वरूणा अग्रवाल ने सभी उपस्थित अतिथियों और वक्ताओं का स्वागत किया तथा कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। गोष्ठी में शामिल विशेषज्ञों, शिक्षकों, अभिभावकों और अधिकारियों ने बच्चों से जुड़े विभिन्न संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा की। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा तभी सुनिश्चित हो सकती है, जब समाज, स्कूल, परिवार और प्रशासन मिलकर सकारात्मक माहौल तैयार करें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि इस प्रकार की गोष्ठियों का मूल उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां हर बच्चा निर्भय होकर आगे बढ़ सके, सीख सके और अपनी क्षमता को विकसित कर सके। उन्होंने बताया कि बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाना, उन्हें मिथ्या जानकारी से बचाना और सही दिशा में मार्गदर्शन देना अति आवश्यक है। इसके साथ ही उन्होंने शुगर बोर्ड अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी स्कूलों में बच्चों को अत्यधिक चीनी के सेवन से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक किया जा रहा है, ताकि वे स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित हों।
एनसीपीसीआर प्रतिनिधि बृजेश ने राष्ट्रीय स्तर पर पिछले छह महीनों में आयोग द्वारा किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोग द्वारा 26 हजार से अधिक मामलों का निस्तारण किया गया है और 23 सौ बच्चों को तस्करी जैसी गंभीर परिस्थितियों से सकुशल बचाया गया है। इसके अतिरिक्त आयोग ने विभिन्न राज्यों में निरीक्षण, गोष्ठियां, दौरे और समीक्षा बैठकों के माध्यम से बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और समान अवसर सुनिश्चित करने हेतु लगातार कार्य किया है। उन्होंने यह भी बताया कि शुगर बोर्ड अभियान के साथ 14 राज्यों के छह लाख से अधिक स्कूल जुड़ चुके हैं, जो बच्चों को अत्यधिक चीनी सेवन के खतरों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
गोष्ठी में विशेषज्ञों ने बच्चों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मार्गदर्शन दिया। डॉ. निशांत इकबाल ने स्कूलों में होने वाली बुलिंग और साइबर बुलिंग की पहचान, रोकथाम और प्रतिक्रिया तंत्र पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. रंजिता जौहरी ने स्कूलों में सुरक्षित वातावरण, शिक्षकदृबच्चेदृअभिभावकों के बीच संवाद और सामंजस्य की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ता ममता रौथाण ने बाल अधिकारों के कानूनी स्वरूप और उपलब्ध संरक्षण तंत्र के बारे में जानकारी साझा की।
