चमोली। मां नंदा देवी की ऐतिहासिक बड़ी जात के आयोजन वर्ष को लेकर चल रहे विवाद के बीच सिद्धपीठ कुरुड़ से जुड़ी आयोजन समिति ने वर्ष 2026 में ही बड़ी जात आयोजित करने का दावा दोहराया है। समिति ने कहा है कि 05 सितंबर 2026 से बड़ी जात शुरू करने की तैयारी है।
गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में समिति पदाधिकारियों ने बताया कि जनवरी 2026 में कुरुड़ क्षेत्र के 484 गांवों के प्रतिनिधियों और गौड़ पुजारियों की मौजूदगी में हुई महापंचायत में सामूहिक रूप से वर्ष 2026 में बड़ी जात आयोजित करने का निर्णय लिया गया था। इसी निर्णय के बाद आयोजन समिति का गठन किया गया।
धार्मिक परंपरा के आधार पर 2026 में यात्रा कराने का संकल्प
समिति अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि मां नंदा की धार्मिक परंपरा और मान्यता के अनुरूप बड़ी जात के आयोजन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि वसंत पंचमी के दिन मां नंदा के प्रकट होकर होमकुंड कैलाश जाने की इच्छा व्यक्त करने की मान्यता है। इसी आस्था के आधार पर समिति वर्ष 2026 में यात्रा आयोजित करने के संकल्प पर कायम है।
उन्होंने कहा कि 13 अगस्त 2026 को सिद्धपीठ कुरुड़ में मां नंदा के पुनः अवतरित होने की परंपरा के बाद भी 2026 में यात्रा कराने का संकल्प दोहराया गया है। समिति के अनुसार पिछले कई महीनों से जिला प्रशासन, राज्य सरकार और संबंधित विभागों के साथ यात्रा के आयोजन, मार्ग और व्यवस्थाओं को लेकर पत्राचार किया जा रहा है।
संशोधित रूट मैप में प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल
समिति के महासचिव अशोक गौड़ ने बताया कि बड़ी जात के लिए संशोधित रूट मैप भी संबंधित स्तर पर प्रस्तुत किया गया है। इसमें नंदा सिद्धपीठ मंदिर कुरुड़, देवराड़ा, ज्योतिर्मठ-ताड़ा क्षेत्र, दशमद्वार मंदिर हिंडोली, शैलेश्वर महादेव मंदिर बैनोली और मां नंदा देवी मंदिर लाता सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों को शामिल करने का आग्रह किया गया है।
समिति ने कहा कि यात्रा के दौरान निर्जन और उच्च हिमालयी पड़ावों पर व्यवस्थाओं को लेकर विशेष तैयारी जरूरी है। इसके लिए ग्राम प्रधानों, मंदिर समितियों और स्थानीय प्रबुद्धजनों की अध्यक्षता में पड़ाव समितियों के गठन का सुझाव दिया गया है।
2026 में बड़ी जात पर कायम कुरुड़ समिति
प्रेस वार्ता में समिति पदाधिकारियों ने कहा कि नंदा राजजात समिति की ओर से राजजात को वर्ष 2027 में आयोजित करने का निर्णय लिया जा चुका है, जबकि कुरुड़ पक्ष वर्ष 2026 में बड़ी जात कराने के निर्णय पर कायम है।
समिति ने स्पष्ट किया कि यह विषय राजनीतिक विवाद का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और परंपरा का विषय है। समिति ने सरकार, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, मंदिर समितियों, धर्मगुरुओं और श्रद्धालुओं से आयोजन में सहयोग की अपील की। साथ ही कहा कि किसी भी पक्ष की भावनाओं को ठेस न पहुंचे और इस विषय को राजनीतिक विवाद का रूप न दिया जाए।
उच्च हिमालयी पड़ावों की व्यवस्थाओं की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
समिति ने राज्य सरकार और चमोली प्रशासन से बड़ी जात की तैयारियों तथा विशेष रूप से उच्च हिमालयी और निर्जन पड़ावों पर की जा रही व्यवस्थाओं की जानकारी सार्वजनिक करने का आग्रह किया है। समिति का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं के बीच किसी प्रकार की भ्रांति नहीं रहेगी।
