हाथियों और अन्य वन्यजीवों से मिलेगी कुंभ क्षेत्र को राहत, 8.30 किलोमीटर लंबी खाई के साथ होगी फेंसिंग।

 

हरिद्वार। कुंभ मेला क्षेत्र और आबादी वाले इलाकों में हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए वन विभाग ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। बैरागी कैंप से कुंडी तक करीब 8.30 किलोमीटर लंबी और तीन मीटर चौड़ी खाई बनाई जाएगी। इसके बाद खाई के किनारे फेंसिंग भी की जाएगी, जिससे हाथियों का आबादी क्षेत्र में प्रवेश पूरी तरह रोका जा सके।

वन क्षेत्राधिकारी शिशपाल ने बताया कि कुंभ मेला कार्यों के दृष्टिगत यह कार्य करीब 2.32 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है। खाई और फेंसिंग तैयार होने के बाद हाथियों की आबादी क्षेत्र में आवाजाही पर प्रभावी रूप से रोक लगने की उम्मीद है। इससे कुंभ क्षेत्र में रहने वाले लोगों के साथ ही श्रद्धालुओं की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

सिंचाई विभाग की टीहरी पुनर्वास शाखा के अधिशासी अभियंता अनुभव नौटियाल ने बताया कि मानसून खत्म होते ही खाई निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा और दिसंबर के अंत तक इसे पूरी तरह पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य की निगरानी वन विभाग, हरिद्वार द्वारा की जाएगी। विभाग का प्रयास है कि निर्धारित समयसीमा में खाई और फेंसिंग का कार्य पूरा कर हाथियों की आवाजाही से प्रभावित क्षेत्रों को स्थायी राहत दी जा सके।

 

 

 *हाथी सुरक्षा पर पहले भी खर्च हुए करोड़ों, रखरखाव के अभाव में बेकार हुए प्रोजेक्ट*

 

हरिद्वार। कुंभ क्षेत्र में हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही रोकने के लिए वन विभाग की ओर से पहले भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इस क्षेत्र में करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से हाथी सुरक्षा दीवार बनाई गई थी। इसके अलावा करीब 95 लाख रुपये की लागत से फेंसिंग का कार्य भी कराया गया था। हालांकि समय पर मरम्मत और देखभाल नहीं होने के कारण दोनों प्रोजेक्ट अब लगभग पूरी तरह से बेकार हो चुके हैं।

हरिद्वार डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि इस बार प्रस्तावित कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास रहेगा कि सुरक्षा दीवार और फेंसिंग लंबे समय तक प्रभावी रहें। इस कार्य का मुख्य उद्देश्य कुंभ अवधि के दौरान कुंभ क्षेत्र में हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही को रोकना तथा श्रद्धालुओं और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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