पुरोला की लाल धान को नई पहचान दिलाने वाली स्वतंत्री बंधानी को मिला उत्तराखंड गौरव रत्न सम्मान

पारंपरिक कृषि विरासत के संरक्षण में निभा रहीं अहम भूमिका, इससे पहले मिल चुका है तीलू रौतेली पुरस्कार

उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले के पुरोला क्षेत्र के पारंपरिक लाल धान को नई पहचान दिलाने और उत्तराखंड की विलुप्त होती कृषि विरासत के संरक्षण में जुटीं स्वतंत्री बंधानी को उत्तराखंड गौरव रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया है। उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। इससे पहले भी स्वतंत्री बंधानी को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।

स्वतंत्री बंधानी लंबे समय से पुरोला क्षेत्र में उत्पादित विशिष्ट लाल धान के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से पुरोला के पारंपरिक लाल धान को नई पहचान मिली है। उन्होंने पारंपरिक बीजों के संरक्षण, लाल धान की खेती को बढ़ावा देने और महिला किसानों को इस अभियान से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लुप्त होते पहाड़ी अनाजों को बचाने की मुहिम

स्वतंत्री बंधानी का प्रयास केवल लाल धान के संरक्षण तक सीमित नहीं है। उन्होंने विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके पहाड़ी अनाज चीणा और कौणी के संरक्षण एवं पुनर्जीवन को भी अपने अभियान का हिस्सा बनाया है। कभी पहाड़ की खेती का प्रमुख हिस्सा रहे ये पारंपरिक अनाज बदलती कृषि पद्धतियों और खानपान की आदतों के चलते धीरे-धीरे खेती से दूर होते चले गए। ऐसे में इनके पारंपरिक बीजों को संरक्षित करने और किसानों को दोबारा इनकी खेती के लिए प्रेरित करने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है।

इसके अलावा वह मंडुवा, झंगोरा और अन्य पारंपरिक श्री अन्न के उत्पादन को प्रोत्साहित कर पहाड़ की पोषण परंपरा और कृषि जैव विविधता को बचाने के लिए भी लगातार प्रयासरत हैं। उनका उद्देश्य स्थानीय कृषि उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए आजीविका के नए अवसर विकसित करना भी है।

कृषि विरासत के संरक्षण को मिलेगी नई प्रेरणा

स्वतंत्री बंधानी को उत्तराखंड गौरव रत्न सम्मान मिलने से जिले में खुशी की लहर है। यह सम्मान उनके वर्षों के समर्पण और मेहनत की पहचान होने के साथ ही उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि विरासत, स्थानीय बीजों और पहाड़ी अनाजों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी नई प्रेरणा देगा।

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