देहरादून। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए), देहरादून में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) 2024 बैच के परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मुख्य अतिथि के रूप में सफल अधिकारियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए।
समारोह में 109 भारतीय वन सेवा परिवीक्षार्थियों तथा भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने 20 माह का प्रशिक्षण पूर्ण किया। इनमें 75 अधिकारियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर ऑनर्स डिप्लोमा हासिल किया। राजस्थान संवर्ग की सुश्री प्रतीक्षा नानासाहेब काले बैच की टॉपर रहीं।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि आज प्रशिक्षण पूरा करने वाले युवा अधिकारी विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और मरुस्थलीकरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नवाचार, आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा जनभागीदारी के प्रभावी उपयोग पर बल दिया।
उन्होंने अधिकारियों से उच्च नैतिक मूल्यों, कार्यकुशलता, समय प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि “एक अच्छा अधिकारी वही है जो सबसे पहले एक अच्छा इंसान हो।” उन्होंने कहा कि नेतृत्व का उद्देश्य केवल प्रशासन करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना भी है।

आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया ने बताया कि अकादमी वर्ष 1938 से वन अधिकारियों के प्रशिक्षण का प्रमुख संस्थान रही है। उन्होंने कहा कि संशोधित 20 माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में कक्षीय अध्ययन के साथ वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय सुशासन, उन्नत प्रौद्योगिकी, नेतृत्व विकास तथा देश के विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों में क्षेत्रीय अभ्यासों पर विशेष ध्यान दिया गया।
समारोह में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, आईसीएफआरई की महानिदेशक कंचन देवी, आईजीएनएफए के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न संस्थानों के प्रमुख, सेवानिवृत्त भारतीय वन सेवा अधिकारी, प्रशिक्षु अधिकारी एवं उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
