रुद्रप्रयाग। पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजित भगवान तुंगनाथ धाम की यात्रा इस वर्ष नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम के लगातार बदलते मिजाज के बावजूद धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 1.56 लाख के पार पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए यात्रा के कपाट बंद होने तक यह आंकड़ा दो लाख के पार पहुंचने का अनुमान जताया जा रहा है।
यात्रा शुरू होने के बाद से ही तुंगनाथ धाम देशभर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में यात्री चोपता पहुंच रहे हैं। यहां से करीब चार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन कर रहे हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलने के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है।
यात्रा के दूसरे चरण में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
तुंगनाथ धाम की यात्रा के दूसरे चरण में श्रद्धालुओं की संख्या में विशेष तेजी देखने को मिली है। सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के दूसरे सप्ताह तक बड़ी संख्या में यात्रियों के पहुंचने से चोपता और तुंगनाथ क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों में भी तेजी आई है।
धार्मिक आस्था के साथ तुंगनाथ क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों और साहसिक पर्यटन के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन रहा है। हिमालय की खूबसूरत चोटियां, विस्तृत बुग्याल और शांत प्राकृतिक वातावरण यहां आने वाले पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
स्थानीय कारोबार और रोजगार को मिल रहा बढ़ावा
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सीधा लाभ स्थानीय कारोबारियों को मिल रहा है। यात्रा सीजन में होटल, होमस्टे, ढाबा, दुकान और घोड़ा-खच्चर संचालन सहित पर्यटन से जुड़ी अन्य गतिविधियों में कारोबार बढ़ा है।
इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी गति मिल रही है। तुंगनाथ धाम की बढ़ती लोकप्रियता से चोपता और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आजीविका को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
पंचकेदारों में विशेष धार्मिक महत्व रखता है तुंगनाथ धाम
भगवान तुंगनाथ पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में पूजित हैं। धाम का धार्मिक और पौराणिक महत्व विशेष माना जाता है। मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने भगवान शिव की आराधना के लिए हिमालय की ओर प्रस्थान किया था। तुंगनाथ धाम इसी धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
धाम की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को विशेष अनुभूति प्रदान करता है। हिमालयी चोटियों और बुग्यालों के बीच स्थित यह तीर्थस्थल धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति पर्यटन के लिए भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।
पैदल मार्ग पर सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत
तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने कहा कि यात्रियों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए पैदल मार्ग पर सुविधाओं का विस्तार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने पेयजल, शौचालय, विश्राम स्थलों और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दिया, ताकि बढ़ती यात्री संख्या के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकें।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में तुंगनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 1.56 लाख से अधिक हो चुकी है। यात्रा के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी रहने की संभावना है। ऐसे में कपाट बंद होने तक यात्रियों की संख्या दो लाख से अधिक पहुंचने का अनुमान है।
तुंगनाथ धाम में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या पंचकेदारों के प्रति देशभर में आस्था और क्षेत्र में धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है।
