उत्तरकाशी। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के पावन अवसर पर डांग गांव स्थित गंगा विश्व शांति सद्भावना धाम में आयोजित श्रीमद् गंगा भागवत कथा अमृत महोत्सव में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लिया।
कथा व्यास डॉ. दुर्गेश आचार्य ने अपने प्रवचनों में कहा कि “कृष्ण कथा ही अमृत तत्त्वरस है।” उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपनी इंद्रियों में श्रीकृष्ण के स्वरूप को धारण करता है, तभी वह परम आनंद की अनुभूति करता है। यही श्रीकृष्ण की रासलीला का वास्तविक आध्यात्मिक स्वरूप है।

अपने प्रवचन में उन्होंने श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि पूतना वध अज्ञान के अंत, तृणावर्त वध वायु की शुद्धि, मिट्टी खाने की लीला पृथ्वी तत्व की महत्ता और कालिय नाग दमन जल संरक्षण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और जहरीले रसायनों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है। ऐसे में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना और धरती की उर्वरता बनाए रखना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने नदियों के बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा कि गंगा सहित सभी नदियों को स्वच्छ और अविरल बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। गोवर्धन लीला का उल्लेख करते हुए उन्होंने पर्वत, वन, जल और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, जबकि व्योमासुर वध को आकाश और ओजोन परत की रक्षा से जोड़ते हुए प्रकृति संरक्षण को मानव जीवन का सबसे बड़ा दायित्व बताया।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर धाम में दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और संतों के आशीर्वचन का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए देश, समाज और प्रकृति के कल्याण की कामना की।
