रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम में बढ़ते पर्यटक दबाव के बीच पर्यावरण संरक्षण और कूड़ा प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन की ‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ असर दिखाने लगी है। अभियान के तहत श्रद्धालु अपने साथ सूखा कूड़ा वापस ला रहे हैं। अब तक 12 टन सूखा कूड़ा केदारनाथ धाम से गौरीकुंड पहुंचाया जा चुका है, जबकि 4732 श्रद्धालु इस अभियान से जुड़ चुके हैं।जिलाधिकारी विशाल मिश्रा के मार्गदर्शन में नगर पंचायत केदारनाथ की ओर से हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन और सुलभ इंटरनेशनल के सहयोग से यह अभियान संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केदारनाथ धाम और पैदल यात्रा मार्ग को सूखे कचरे से मुक्त रखना है।
श्रद्धालुओं को दिए जा रहे विशेष बैग
‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ के तहत केदारनाथ धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को विशेष बैग उपलब्ध कराए जाते हैं। श्रद्धालु इन बैगों में प्लास्टिक की बोतलें, रैपर, पैकेजिंग सामग्री और अन्य सूखा कचरा एकत्र करते हैं। इसके बाद वे करीब चार से पांच किलोग्राम तक सूखा अपशिष्ट अपने साथ गौरीकुंड लेकर पहुंचते हैं।
अभियान से जहां केदारनाथ धाम और यात्रा मार्ग पर कूड़ा फैलने पर अंकुश लगाने में मदद मिल रही है, वहीं श्रद्धालुओं में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ रही है।
तीन संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी
अभियान का संचालन उपजिलाधिकारी ऊखीमठ एवं प्रभारी अधिकारी नगर पंचायत केदारनाथ के निर्देशन में किया जा रहा है।
हीलिंग हिमालयास फाउंडेशन श्रद्धालुओं को कूड़ा संग्रहण के लिए बैग उपलब्ध कराने के साथ गौरीकुंड में कूड़े के सुरक्षित संग्रहण की व्यवस्था कर रहा है। वहीं सुलभ इंटरनेशनल एकत्रित कूड़े के परिवहन और वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप उसके अंतिम निस्तारण की जिम्मेदारी निभा रहा है।

यात्रा अवधि में जारी रहेगा अभियान
नगर पंचायत केदारनाथ के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती ने बताया कि ‘कैरी मी बैक पॉलिसी’ के तहत अब तक 12 टन सूखा कूड़ा गौरीकुंड लाया जा चुका है। यात्रा अवधि के दौरान अभियान लगातार जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सक्रिय सहभागिता से केदारनाथ धाम को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
