वो लड़की, जो मुस्कराहटों में सपने बोती थी, नहर में बहा दी गई…
97 गवाह, 500 पन्नों की चार्जशीट, दो साल आठ महीने तक चली सुनवाई

DEHRADUN: उत्तराखंड की सुरम्य वादियों में बसा एक छोटा-सा कस्बा, श्रीकोट। यहीं की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी, अपने परिवार की उम्मीद और आत्मनिर्भरता का प्रतीक थी। वह वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट का काम करती थी। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस जगह से वो आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही है, वही उसकी आखिरी मंज़िल बन जाएगी।
18 सितंबर 2022 को अंकिता लापता हो गई। परिवार ने मदद की गुहार लगाई। खुलासा हुआ कि
रिसॉर्ट का मालिक पुलकित आर्य, जो एक पूर्व भाजपा नेता का बेटा है और उसके दो साथी, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता, अंकिता पर ‘वीआईपी मेहमानों’ को अवैध सेवाएं देने का दबाव बना रहे थे। जब उसने इनकार किया, तो उसे चीला नहर में धक्का दे दिया गया। और फिर अंकिता के लिये वनंतरा रिसॉर्ट आखिरी मंज़िल बन कर रह गया।

अंकिता का जाना केवल एक लड़की की हत्या नहीं है, बल्कि यह उन तमाम लड़कियों के सपनों की हत्या है, जो ईमानदारी से जीना चाहती हैं। समाज को अब पूछना होगा। क्या हमारे सिस्टम में एक आम लड़की की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?। अंकिता की कहानी हमें झकझोरती है, कानून की सुस्ती, व्यवस्था की सीमाएं, और सत्ता की छाया में पलते अपराध। यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती। यह एक शुरुआत है, उस बदलाव की, जिसमें हर अंकिता को न्याय मिले, समय पर मिले, और पूर्ण मिले।
जनआंदोलन, विरोध, कैंडल मार्च और सड़कों पर इंसाफ की उठी आवाज़

घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में जनाक्रोश उमड़ा। सामाजिक संगठनों, सियासी दलों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों ने प्रदर्शन किए। ‘जस्टिस फॉर अंकिता’ देशव्यापी मुहिम बन गई। देहरादून, ऋषिकेश, दिल्ली और मुंबई तक लोगों ने कैंडल मार्च निकाले। उत्तराखण्ड विधानसभा में भी यह मुद्दा गर्माया।
