तैयार होकर भी ‘सफेद हाथी’ बना मोबाइल टावर, नेटवर्क के लिए ग्रामीण 10 किमी चलने को मजबूर

 

चमोली। सूचना क्रांति के इस दौर में जहाँ देश 5G की रफ्तार से दौड़ने का दावा कर रहा है, वहीं जनपद के निजमुला घाटी स्थित मोली-हड़ूंग क्षेत्र में डिजिटल इंडिया के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। यहाँ बीएसएनएल का मोबाइल टावर एक साल से बनकर तैयार खड़ा है, लेकिन नेटवर्क न होने के कारण सैकड़ों ग्रामीणों के फोन आज भी “शोपीस” बने हुए हैं।
ग्रामीणों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने के उद्देश्य से विभाग ने एक वर्ष पूर्व मोली हड़ूंग में बीएसएनएल का टावर स्थापित किया था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब अपनों से बात करने के लिए उन्हें पहाड़ों की खाक नहीं छाननी पड़ेगी, लेकिन विडंबना देखिए कि टावर खड़ा होने के बावजूद सिग्नल गायब है। आलम यह है कि फोन की एक घंटी सुनने के लिए ग्रामीणों को आज भी 8 से 10 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर व्यारा या अन्य ऊंचे इलाकों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
नेटवर्क की इस किल्लत ने क्षेत्र में सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
ग्राम प्रधान भगत फर्स्वाण का कहना है कि डिजिटल युग में भी उनके गांव के लोग संचार सुविधा के लिए तरस रहे हैं। बात करने के लिए मिलों पैदल चलना समय और ऊर्जा दोनों की बर्बादी है।
पूर्व ग्राम प्रधान बृज लाल ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि नेटवर्क न होने का सबसे खौफनाक पहलू आपातकाल है। यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाए या कोई दुर्घटना हो जाए, तो एम्बुलेंस बुलाने या सूचना देने तक का कोई साधन उपलब्ध नहीं होता।
एक ओर जहाँ बीएसएनएल के अधिकारी सूचना क्रांति का ढोल पीट रहे हैं, वहीं धरातल पर मोली-हड़ूंग की स्थिति उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही टावर को सुचारू कर नेटवर्क की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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