उत्तरकाशी। चीन सीमा से सटे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तरकाशी जनपद के चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे पर भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर तीन दिवसीय सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। यह अभ्यास बुधवार से प्रारंभ हुआ है, जो 6 फरवरी तक चलेगा।
अभ्यास के दौरान वायुसेना के बहुउद्देश्यीय परिवहन विमान एएन-32 की लैंडिंग और टेकऑफ का तीन बार सफल अभ्यास किया गया। सीमांत और पर्वतीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण यह अभ्यास रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
गौरतलब है कि उत्तरकाशी जनपद भारत-चीन सीमा से सीधे जुड़ा हुआ है और अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। गंगोत्री-यमुनोत्री जैसी रणनीतिक घाटियों की सुरक्षा, सैन्य आवाजाही, गश्त और हवाई अभियानों के लिए उत्तरकाशी का विशेष महत्व है।
उत्तरकाशी जनपद चीन के साथ एक लंबी और दुर्गम अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है, जिससे सुरक्षा के लिहाज से चिन्यालीसौड़ एयरपोर्ट वायुसेना के लिए बेहद अहम बन जाता है। इसी कारण वायुसेना बीते कुछ समय से इस हवाई अड्डे को एडवांस लैंडिंग ग्राउंड (ALG) के रूप में विकसित करने पर कार्य कर रही है।
इसी क्रम में वायुसेना समय-समय पर यहां अपने बहुउद्देश्यीय विमानों और हेलीकॉप्टरों की लैंडिंग व टेकऑफ का अभ्यास करती रही है। माना जा रहा है कि यह अभ्यास सीमावर्ती और पर्वतीय क्षेत्रों में आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि किसी भी विपरीत स्थिति में वायुसेना पूरी क्षमता के साथ कार्य कर सके।
इससे पूर्व भारतीय वायुसेना द्वारा ‘ऑपरेशन गगन’ समेत दिसंबर 2025 में भी यहां सैन्य अभ्यास किया गया था।
