ओलंपिक की मेजबानी की दावेदारी में टिहरी झील निभाएगी अहम भूमिका, कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी चिन्हित हुआ विश्व स्तरीय जलाशय

इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप और चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप का भव्य आगाज, 300 से अधिक विदेशी और भारतीय एथलीट दिखाएंगे जलक्रीड़ा का हुनर

नई टिहरी।   विश्व के मानचित्र पर साहसिक पर्यटन और जल क्रीड़ा के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रही टिहरी झील में शुक्रवार को उत्साह और रोमांच का एक नया अध्याय जुड़ गया। टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड, भारतीय ओलंपिक संघ और इंडियन कयाकिंग एंड कैनोइंग एसोसिएशन (आइकेसीए) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इंटरनेशनल प्रेसिडेंट कप और चतुर्थ टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप का शानदार और विधिवत आगाज हो गया है। कोटी कॉलोनी स्थित झील के तट पर आयोजित इस महाकुंभ में भारत सहित दुनिया भर के 22 देशों के 300 से अधिक एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन ने टिहरी की वादियों को वैश्विक पटल पर एक नई पहचान दी है। विभिन्न देशों से आए खिलाड़ियों ने टिहरी झील के विशाल विस्तार, स्वच्छ जल और यहां के अनुकूल वातावरण की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए इसे साहसिक खेलों के लिए एक उत्कृष्ट और विश्व स्तरीय स्थल बताया है।

 

प्रतियोगिता का शुभारंभ टिहरी विधायक किशोर उपाध्याय, नगर पालिका अध्यक्ष मोहन सिंह रावत, एशियन कयाकिंग एवं कैनोइंग एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत कुशवाहा, उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. डीके सिंह, टीएचडीसी के सीजीएम एमके सिंह और डॉ. एएन त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विधायक किशोर उपाध्याय ने कहा कि टिहरी झील अब केवल ऊर्जा उत्पादन का स्रोत नहीं रही, बल्कि यह साहसिक खेलों का एक विशिष्ट और अनिवार्य स्थल बन चुका है। उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित टिहरी वाटर स्पोर्ट्स कप और 38वें नेशनल गेम्स के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया है कि टिहरी किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि बीते दिवस भारत सरकार के खेल सचिव और उनकी उच्च स्तरीय टीम ने टिहरी और कोटेश्वर झील का गहन निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण के बाद उन्होंने इस जलाशय को कॉमनवेल्थ गेम्स सहित अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय खेलों के आयोजन के लिए चिन्हित किया है, जो टिहरी और पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है।

 

कार्यक्रम में एशियन कैनोइंग एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत कुशवाहा ने इस आयोजन की पृष्ठभूमि और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में टीएचडीसी के तत्कालीन सीएमडी दिवंगत आरके विश्नोई ने जो सपना देखा था, वह आज एक विराट रूप ले चुका है। उनका विजन था कि टिहरी को जल क्रीड़ा के क्षेत्र में सर्वाेच्च शिखर पर ले जाया जाए। कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी भारत में कराने की इच्छा व्यक्त की है। यदि भारत को यह मेजबानी मिलती है, तो वाटर स्पोर्ट्स के लिए टिहरी झील एक विशिष्ट और निर्णायक भूमिका निभाएगी, क्योंकि यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर ओलंपिक मानकों के अनुरूप विकसित हो रहा है। वहीं, पालिकाध्यक्ष मोहन सिंह रावत ने टिहरी झील और नई टिहरी शहर के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास की रूपरेखा तैयार करने पर जोर दिया, ताकि पर्यटन के जरिए स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के व्यापक अवसर पैदा किए जा सकें।

 

उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. डीके सिंह ने प्रतियोगिता की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि इस इवेंट में इंडोनेशिया, किर्गिस्तान, फिलीपींस, अर्मेनिया, श्रीलंका, यूक्रेन, हंगरी, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कजाकिस्तान, और ट्यूनेशिया सहित कुल 21 विदेशी राष्ट्रों और मेजबान भारत के एथलीट कयाकिंग और कैनोइंग की विभिन्न रोमांचक स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। अगले तीन दिनों तक टिहरी झील में इन खिलाड़ियों के बीच कड़े मुकाबले देखने को मिलेंगे। प्रतियोगिता का समापन 30 नवंबर को प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा किया जाएगा, जहां वे विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत करेंगे। शुभारंभ के अवसर पर टीएचडीसी के एजीएम विजय सहगल, डीजीएम मोहन सिंह श्रीस्वाल, मनवीर नेगी, दीपक उनियाल, मनोज राय, टीएस नेगी, गिरीश उनियाल, पदम चमोली और सुरेश सहित बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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