देहरादून। प्रदेश के जलागम प्रबंधन मंत्री राम सिंह कैड़ा ने गुरुवार को विधानसभा स्थित सभागार कक्ष में विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। बैठक के दौरान मंत्री ने जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
मंत्री राम सिंह कैड़ा ने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों में जल संरक्षण के उद्देश्य से जलागम प्रबंधन विभाग द्वारा चाल-खालों के माध्यम से जल संरक्षण एवं जल स्रोतों के रिचार्ज का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य की छोटी-बड़ी सभी नदियों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में भी विभाग सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पारंपरिक जल स्रोतों जैसे नौले और धारों के संरक्षण एवं सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि भविष्य में जल संकट की समस्या को प्रभावी रूप से कम किया जा सके।
बैठक में मंत्री ने कहा कि विभाग का उद्देश्य चयनित सूक्ष्म जलागम क्षेत्रों में ग्रामीण समुदाय की सहभागिता से प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की दक्षता बढ़ाना, कृषि उत्पादकता में सुधार करना तथा पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने नदियों के संरक्षण के साथ-साथ नदी तटों पर बसे गांवों के संरक्षण और सुदृढ़ीकरण के लिए भी योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक में राज्य स्तरीय स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन प्राधिकरण (एसएआरआरए), विश्व बैंक पोषित उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना (यूसीआरआरएफपी), प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी 2.0) तथा जलागम प्रबंधन विभाग की अन्य योजनाओं की प्रगति पर विस्तृत चर्चा की गई।
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं और परियोजनाओं को जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने निर्माण एवं विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि कार्यों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बैठक में विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति और आगामी कार्ययोजना की जानकारी भी प्रस्तुत की।
