उत्तरकाशी। बबीता पांडे की तलाश में चलाया जा रहा सर्च ऑपरेशन छठे दिन भी जारी रहा, लेकिन अब तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लापता ट्रैकर की खोज के लिए विभिन्न एजेंसियों की संयुक्त टीमें लगातार अभियान चला रही हैं। इस बीच, सुरक्षा व्यवस्था और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की समीक्षा के मद्देनजर वन विभाग ने दयारा बुग्याल ट्रैक पर ट्रेकिंग गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया है।
जानकारी के अनुसार, रामनगर निवासी बबीता पांडे अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रैक पर ट्रेकिंग के लिए गई थीं। बीते सप्ताह गोई क्षेत्र के पास वह रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गईं। घटना के बाद से एसडीआरएफ, पुलिस, सेना, आईटीबीपी, वन विभाग, आपदा प्रबंधन, जल पुलिस और क्यूआरटी की संयुक्त टीमें लगातार खोज अभियान चला रही हैं।
गुरुवार को विशेष सर्च टीमों ने गोई क्षेत्र की झीलों, जल स्रोतों और आसपास के दुर्गम इलाकों में गहन तलाशी अभियान चलाया। डीप सर्च ऑपरेशन के बावजूद महिला ट्रैकर का कोई पता नहीं चल सका। अभियान में करीब 150 से अधिक जवान और अधिकारी शामिल हैं।

घटना के बाद वन विभाग ने दयारा ट्रैक पर ट्रेकर्स की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी है। विभाग का कहना है कि ट्रेकिंग से संबंधित एसओपी की समीक्षा की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। साथ ही, ट्रेकर्स की लगातार आवाजाही से रेस्क्यू अभियान प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।
हालांकि, इस फैसले का ट्रेकिंग संगठनों ने विरोध किया है। उनका कहना है कि एक घटना के आधार पर सभी ट्रेकिंग गतिविधियों को बंद करना उचित नहीं है। उन्होंने प्रशासन से पंजीकरण और निगरानी व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की मांग की है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह प्रतिबंध अस्थायी है और एसओपी समीक्षा पूरी होने के बाद ट्रैक को दोबारा खोल दिया जाएगा। फिलहाल सभी एजेंसियां बबीता पांडे की तलाश में जुटी हुई हैं और परिजनों की उम्मीदें खोज अभियान पर टिकी हैं।
