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टोड़ा कल्याणपुर की रामलीला में सजी श्रीराम-हनुमान मिलन की लीला, जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा पंडाल

रुड़की। रुड़की क्षेत्र के ग्राम टोड़ा कल्याणपुर में आयोजित ऐतिहासिक श्रीरामलीला में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों का भव्य मंचन किया जा रहा है। इसी क्रम में श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान जी के प्रथम मिलन तथा हनुमान जी द्वारा श्रीराम और लक्ष्मण को वानरराज सुग्रीव से मिलवाने के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के शानदार अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। रामलीला मैदान में मौजूद श्रद्धालु जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारे लगाते नजर आए।

ब्राह्मण का रूप धारण कर प्रभु श्रीराम से मिले हनुमान

रामलीला मंचन में दिखाया गया कि माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम अपने छोटे भाई लक्ष्मण के साथ ऋष्यमूक पर्वत के समीप पहुंचते हैं। इसी दौरान वानरराज सुग्रीव के मंत्री हनुमान जी की नजर दोनों भाइयों पर पड़ती है। उनके तेजस्वी स्वरूप को देखकर हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धारण कर उनके पास पहुंचते हैं और उनके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।

संवाद के दौरान हनुमान जी को प्रभु श्रीराम के वास्तविक स्वरूप का बोध होता है। इसके बाद वह भावविभोर होकर प्रभु के चरणों में नतमस्तक हो जाते हैं। श्रीराम और हनुमान जी के इस प्रथम मिलन के दृश्य को कलाकारों ने श्रद्धा और भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ प्रस्तुत किया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

श्रीराम-लक्ष्मण को कंधों पर बैठाकर सुग्रीव के पास पहुंचे हनुमान

मंचन के अगले दृश्य में हनुमान जी भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को अपने कंधों पर बैठाकर वानरराज सुग्रीव के पास ले जाते हैं। इसके बाद श्रीराम और सुग्रीव के मिलन का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने दोनों के बीच मित्रता, विश्वास और सहयोग की भावना को प्रभावशाली तरीके से दर्शाया।

रामायण का यह प्रसंग माता सीता की खोज और आगे चलकर लंका विजय की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। हनुमान जी की बुद्धिमत्ता, निष्ठा और समर्पण ने श्रीराम और सुग्रीव के बीच मित्रता स्थापित कराने में अहम भूमिका निभाई। मंचन के दौरान इस प्रसंग को जीवंत रूप में देखकर दर्शकों ने कलाकारों की सराहना की।

हनुमान जी के चरित्र से मिलता है सेवा और समर्पण का संदेश

श्रीराम-हनुमान मिलन का प्रसंग धार्मिक आस्था के साथ-साथ निस्वार्थ सेवा, विनम्रता और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा भी देता है। हनुमान जी का चरित्र सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता और समर्पण के साथ किया गया कार्य कठिन से कठिन लक्ष्य को प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

वहीं, भगवान श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता विश्वास, सहयोग और पारस्परिक निष्ठा का संदेश देती है। रामलीला के माध्यम से इन आदर्शों को समाज तक पहुंचाने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

रामलीला देखने उमड़ रहे श्रद्धालु

टोड़ा कल्याणपुर की ऐतिहासिक श्रीरामलीला क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां प्रतिदिन रामायण के विभिन्न प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है, जिन्हें देखने के लिए ग्रामीणों और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है।

कलाकार संवाद, अभिनय और मंच सज्जा के माध्यम से रामायण की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। श्रीराम और हनुमान जी के मिलन के भावपूर्ण दृश्य ने रामलीला परिसर को भक्तिमय बना दिया। पूरा वातावरण जय श्रीराम और जय बजरंगबली के उद्घोष से गूंज उठा।

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