रुड़की। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल के निर्देशों के क्रम में मंगलवार, 27 अक्टूबर को श्री मारवाड़ कन्या इंटर कॉलेज, रुड़की छावनी में विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार के तत्वावधान और तहसील विधिक सेवा समिति, रुड़की के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा, बाल अपराधों से बचाव और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या भारती अग्रवाल और सहायक प्रबंधक अशोक कुमार अग्रवाल द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में द्वितीय न्यायिक मजिस्ट्रेट दीप्ति पंत उपस्थित रहीं। इस दौरान प्रथम अपर सिविल जज (जू. डि.), रुड़की विनीत श्रीवास्तव और खंड शिक्षा अधिकारी आकांक्षा राठौर का भी स्वागत किया गया।
इसके अलावा रुड़की सिविल लाइंस थाना प्रभारी के प्रतिनिधि उपनिरीक्षक चंद्रमोहन सिंह बिष्ट, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, उप शिक्षा अधिकारी अर्चना शुक्ला तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकार मित्र बालेंदर कुमार और अनिल कश्यप को माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
पॉक्सो अधिनियम के तहत बच्चों को बताए सुरक्षा के अधिकार
जागरूकता कार्यक्रम में न्यायिक मजिस्ट्रेट दीप्ति पंत, प्रथम अपर सिविल जज विनीत श्रीवास्तव और खंड शिक्षा अधिकारी आकांक्षा राठौर ने विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के प्रावधानों को समझाते हुए बताया कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों ने विद्यार्थियों से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार, उत्पीड़न या असुरक्षित स्थिति का सामना करने पर चुप नहीं रहना चाहिए। ऐसी स्थिति में अभिभावकों, शिक्षकों या संबंधित अधिकारियों को जानकारी देकर सहायता प्राप्त करनी चाहिए।
उन्होंने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जागरूकता, समय पर शिकायत और उचित मार्गदर्शन की अहम भूमिका पर भी जोर दिया।
साइबर अपराधों से बचाव और पुलिस सहायता की दी जानकारी
कार्यक्रम में उपनिरीक्षक चंद्रमोहन सिंह बिष्ट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और बच्चों की सुरक्षा में पुलिस की भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस से सहायता लेने तथा संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों को इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई। उन्हें साइबर धोखाधड़ी, ऑनलाइन उत्पीड़न और अन्य डिजिटल अपराधों से बचने के उपायों की जानकारी देते हुए बताया गया कि साइबर अपराध की स्थिति में संबंधित हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

नैतिक मूल्यों और सतर्कता पर दिया जोर
विद्यालय की प्रधानाचार्या भारती अग्रवाल और सहायक प्रबंधक अशोक कुमार अग्रवाल ने विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों को अपनाने, अनुशासन बनाए रखने और अपने आसपास होने वाली गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना विद्यालय, अभिभावकों, प्रशासन और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों को विभिन्न सहायता सेवाओं के हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई, ताकि जरूरत पड़ने पर वे समय रहते मदद प्राप्त कर सकें।
बच्चों की मदद के लिए बताए हेल्पलाइन नंबर
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण सहायता सेवाओं के नंबरों से परिचित कराया गया:
- चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
- नालसा विधिक सहायता हेल्पलाइन: 15100
- पुलिस आपातकालीन सेवा: 112
- साइबर अपराध हेल्पलाइन: 1930
अधिकारियों ने बताया कि बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और यौन अपराधों के मामलों में कानून के तहत दंड का प्रावधान है। ऐसे में बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी देना और जरूरत के समय सहायता प्राप्त करने के तरीकों से परिचित कराना बेहद जरूरी है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जताया आभार
कार्यक्रम के समापन पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरिद्वार के अधिकार मित्र बालेंदर कुमार और अनिल कश्यप ने उपस्थित अतिथियों, अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन का प्राधिकरण परिवार की ओर से आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया। साथ ही बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने और उन्हें जरूरत के समय उचित सहायता उपलब्ध कराने में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया।
