देहरादून। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणी पर उत्तराखंड में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। देहरादून, पौड़ी और नई टिहरी में आयोजित प्रेस वार्ताओं के दौरान भाजपा नेताओं ने अजीत डोभाल के योगदान का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी की टिप्पणी पर आपत्ति जताई और कांग्रेस नेतृत्व से स्पष्टीकरण देने की मांग की।
भाजपा नेताओं ने कहा कि अजीत डोभाल ने देश की सुरक्षा और सामरिक हितों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उनके प्रति की गई टिप्पणी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पार्टी नेताओं ने इसे देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान से जुड़ा विषय बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग उठाई।

वीर सपूतों के सम्मान का मुद्दा उठाया
कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल ने भी राहुल गांधी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता अपने वीर सपूतों के सम्मान के लिए हमेशा खड़ी रहेगी। उन्होंने अजीत डोभाल के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों के प्रति सम्मान की भावना बनाए रखना जरूरी है।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कांग्रेस का रवैया गैर-जिम्मेदाराना रहा है। हालांकि, इस मामले में राहुल गांधी की टिप्पणी के सटीक संदर्भ और कांग्रेस की प्रतिक्रिया को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।
देहरादून से पौड़ी और टिहरी तक भाजपा का विरोध
इस मुद्दे को लेकर भाजपा नेताओं ने देहरादून, पौड़ी और नई टिहरी में प्रेस वार्ताओं के माध्यम से कांग्रेस पर निशाना साधा। नेताओं ने अजीत डोभाल की भूमिका और देश की सुरक्षा में उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा करते समय जिम्मेदारी और तथ्यों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
अजीत डोभाल को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी अब उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन गई है। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के लिए योगदान देने वाले व्यक्तित्वों के सम्मान से जोड़ रही है। वहीं, इस प्रकरण पर कांग्रेस का पक्ष सामने आने के बाद राजनीतिक बहस की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल, इस मुद्दे को लेकर प्रदेश में सियासी बयानबाजी तेज है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहने के आसार हैं।
