गंगा किनारे राफ्टिंग और नाइट कैंपिंग बन रही यादगार यात्रा का हिस्सा,चारधाम यात्रा से लौटते यात्रियों को शिवपुरी-बयासी में राफ्टिंग का रोमांच

 

रोजाना हजारों पर्यटक ले रहे साहसिक गतिविधियों का अनुभव, पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश

नई टिहरी।  गर्मियों की छुट्टियों और चारधाम यात्रा के साथ-साथ अब शिवपुरी, बयासी और कोडियाला जैसे राफ्टिंग स्थलों पर गंगा नदी में रिवर राफ्टिंग पर्यटकों के बीच रोमांच और राहत का नया जरिया बनती जा रही है। राफ्टिंग का रोमांच चारधाम यात्रा के थकान भरे सफर को आनंददायक अनुभव में बदल रहा है। राफ्टिंग के लिए बदरीनाथ हाईवे पर जगह-जगह स्थापित किए गए राफ्टिंग सेंटर और नाइट कैंपिंग स्पॉट्स यात्रियों को आकर्षित कर रहे हैं।

स्थानीय संचालकों और व्यापारियों के लिए यह सीजन लाभकारी सिद्ध हो रहा है। राफ्टिंग कराने वालों के चेहरों पर उत्साह झलक रहा है, क्योंकि 350 से 400 राफ्ट हर वीकेंड पर गंगा की लहरों में उतर रही हैं, जिससे 3000 से 3500 पर्यटक प्रतिदिन राफ्टिंग का लुत्फ उठा रहे हैं।

राफ्टिंग स्थलों पर सुरक्षा को लेकर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। गंगा नदी राफ्टिंग प्रबंधन समिति के सचिव जसपाल चौहान ने बताया कि वीकेंड पर विशेष भीड़ के मद्देनज़र सुरक्षा उपकरणों की जगह-जगह जांच की जा रही है। हर राफ्ट में लाइफ जैकेट, सेफ्टी राफ्ट और प्रशिक्षित गाइड की मौजूदगी अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि बिना आवश्यक सुरक्षा मापदंडों को पूरा किए किसी को भी राफ्टिंग की अनुमति नहीं दी जाती।

गुजरात से पहुंचे पर्यटक अभिनंदन ने बताया कि उनके ग्रुप ने चारधाम यात्रा पूरी करने के बाद शिवपुरी में राफ्टिंग का आनंद लिया। उन्होंने बताया कि तेज़ रैपिड्स में राफ्टिंग करना एक रोमांचक अनुभव रहा, जो उन्हें हमेशा याद रहेगा। उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे इस पवित्र स्थल की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करें ताकि माँ गंगा की सुंदरता बरकरार रह सके।

राफ्टिंग केवल रोमांच नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक यात्रा में नया रंग भर रही है। यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और गंगा की पवित्रता के बीच राफ्टिंग एक ऐसी गतिविधि बन गई है, जो पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दे रही है।

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