नीम करौली बाबा का कैंची धाम आध्यात्मिकता मान्यता का केंद्र, दुनिया की कई हस्तियां आती हैं बाबा के दर्शन को 

नैनीताल: नैनीताल से 19 किमी दूर नीम करौली बाबा का कैंची धाम आध्यात्मिकता मान्यता का केंद्र है। क्रिकेटर विराट कोहली से लेकर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और एप्पल के संस्‍थापक स्‍टीव जॉब्‍स जैसे कई दिग्गज आए थे। इन हस्तियों ने अपना जीवन बदलने की कहानियां भी सुनाई हैं। नीम करौली बाबा पहली बार साल 1962 में कैंची धाम आए थे। उन्होंने अपने मित्र पूर्णानंद के साथ मिलकर 15 जून 1964 को कैंची धाम की स्थापना की थी। नीम करौली बाबा ने 15 जून को ही कैंची धाम को स्थापना दिवस के रूप में तय किया था. उन्होंने 10 सितंबर 1973 को शरीर त्यागकर महासमाधि ली थी. समाधि लेने के बाद उनके अस्थि कलश को धाम में ही स्थापित कर दिया गया।  इसके बाद 1974 से बड़े स्तर पर मंदिर का निर्माण हुआ। आश्रम के नाम को लेकर यह माना जाता है कि कैंची धाम की ओर जा रही सड़क कैंची की तरह दो तीखे मोड़ जैसी दिखाई देती है।  इस वजह से धाम का नाम कैंची धाम रखा गया।. नीम करौली बाबा हनुमान को काफी ज्यादा मानते थे। इसी वजह से उन्होंने अपने जीवन में हनुमान जी के 108 मंदिरों को बनवाया।

नीम करौली  बाबा को प्राप्त थी सिद्धियां

नैनीताल: कैंची धाम ट्रस्ट के प्रबंधक प्रदीप शाह  बताते हैं कि बाबा नीम करौली बाबा को सिद्धियां  प्राप्त थी।  लोग बाबा जी को हनुमान जी का ही एक रूप आज भी मानते हैं. भय्यू दा बताते हैं कि  साल 1962 में बाबा जब रानीखेत से भवाली की तरफ आ रहे थे तो वे गाड़ी रोककर शिप्रा नदी के इस पार आ गए और साथ के लोगों से इस स्थान पर स्थित सोमबारी महाराज की गुफा और धूनी के बारे में पूछने लगे।  तब इस जगह पर घना जंगल हुआ करता था। लेकिन महाराज ने इस जगह को जहां आज कैंची धाम स्थित है, हनुमान मंदिर के लिए चिन्हित कर लिए था। कुछ समय बाद इस जगह पर सफाई करवाकर यहां हनुमान मंदिर की स्थापना की। और धीरे धीरे अन्य मंदिरों के स्थापना होती चली गई।

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