अल्पसंख्यक अधिकार दिवस पर चंबा में समानता का संदेश, विधिक साक्षरता शिविर में दी गई अधिकारों की जानकारी

नई टिहरी। भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती इसकी विविधता में निहित है और इसका प्रत्येक स्तंभ अल्पसंख्यकों के हितों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह न केवल एक कानूनी बाध्यता है, बल्कि हम सभी का नैतिक और संवैधानिक कर्तव्य भी है। अल्पसंख्यक अधिकार संरक्षण दिवस के विशेष अवसर पर गुरुवार को चंबा ब्लॉक के सुनार गांव में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा आयोजित एक भव्य विधिक जागरूकता शिविर में यह उद्गार व्यक्त किए गए। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश अमित कुमार सिरोही के दिशा-निर्देशों पर आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज के अल्पसंख्यक वर्ग को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें मुख्यधारा में सशक्त बनाना था।

 

शिविर में बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव आलोक राम त्रिपाठी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे संविधान द्वारा संरक्षित नागरिकों के मूल अधिकार ही अल्पसंख्यक हितों की सबसे बड़ी गारंटी हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि संविधान में अल्पसंख्यकों को अपने धर्म, भाषा और संस्कृति के पालन तथा प्रचार-प्रसार का विशेषाधिकार दिया गया है, ताकि वे अपनी पहचान को अक्षुण्ण रख सकें। उन्होंने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोग समुदाय के विकास और कल्याण के लिए निरंतर कार्यशील है। सचिव ने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी अल्पसंख्यक व्यक्ति को अपने अधिकारों के हनन की शिकायत हो या विधिक सहायता की आवश्यकता हो, तो वे निसंकोच जिला विधिक सेवा प्राधिकरण या क्षेत्र में तैनात अधिकार मित्रों से संपर्क कर सकते हैं।

 

इस दिवस को मनाने की सार्थकता पर जोर देते हुए आलोक राम त्रिपाठी ने कहा कि इसका उद्देश्य आम जनमानस में अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों की समझ को गहरा करना है। यह दिवस अल्पसंख्यक व्यक्तियों के सम्मान, सुरक्षा और कल्याण के लिए समर्थन जुटाने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि समाज और विकास के हर पायदान परकृचाहे वह राजनीतिक हो, सामाजिक हो या आर्थिककृअल्पसंख्यकों की भागीदारी समान और प्रभावी होनी चाहिए। जागरूकता के अभाव में कई बार पात्र व्यक्ति योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते, इसलिए ऐसे शिविरों के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है कि वे जीवन के किसी भी क्षेत्र में बाधा का सामना न करें। इसके अतिरिक्त, शिविर में “सुरक्षित दवा सुरक्षित जीवन” अभियान के तहत जेनेरिक दवाओं की उपयोगिता और महत्व पर भी विस्तृत जानकारी दी गई।

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