उत्तराखंड के जंगलों में पाएं जाने वाली औषधीय जड़ी-बूटियां विलुप्त के कगार पर जंगलों मे साल दरसाल दावानल से नेस्तनाबूत होते औषधीय पौधे

 

श्रीनगर। उत्तराखंड की विश्व विख्यात वन संपदा मंे हर मर्ज की दवा आसानी से मिलती थी। जिससे कठिन से कठिन रोग घर आंगन जंगलों में उगने वाले औषधीय पौधों और जड़ी बूटियों के प्रयोग असाध्य रोग भी समाप्त हो जाते थे और अपितु यहां का जनमानस ही नहीं सभी जीव जंतुओं का रोग निवारण होता था, लेकिन हमारी वन संपदा. को बनाया गया। लचीला कानून और. मानव कुकृत्यों के कारण विगत दशकों से बेखौफ जंगल दावानल का शिकार हो रहे हैं। पशु पक्षियों के भूर्ण, औषधीय पौधौं के अंकुर भष्म हो गये हैं और घटता मानसून, बढता प्रदूषण पर्यावरण को खतरा बढ गया है, लेकिन सरकार और सिस्टम आंखे मूंदे बैठा है। जिससे जंगल के जंगल नेस्तनाबूत हो रहे हैं।

गांव की बात रेडियो के साथ आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने वाली मातृशक्ति पर्यावरण संवर्धन संरक्षण को लेकर चला रहे अभियान के तहत सुबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग के माध्यम से ज्ञापन दिया। कार्यक्रम के सयोंजक माध्यमिक वर्ग बालिका, महिला क्रिकेट प्रतियोगिता के संस्थापक देवेन्द्र गौड़ ने कहा कि हमारे पहाड़ो को परमपिता परमेश्वर का धनवन्तरी वरदान से यहां के जंगलों मे बेसकीमती जीवन रक्षक जड़ी-बूटिंयां होती थी। जिससे मानवीय जीवन ही नही अपितु तमाम प्राणी मात्र सुगंध और इस्तेमाल से स्वस्थ रहते थे, लेकिन मानव की कुकृत्यों से साल दरसाल जंगलो में आगजनी हो रही है।

आगजनी से औषधीय पौध, अंकुर भष्म हो रहे हैं तथा जगंली शाकाहारी जानवरों चारा भूर्ण, पशुओं का चारा और मांसाहारी जानवरों शिकार खत्म हो गये हैं। जिसकी. वजह से जीवित जंगली जानवर आमजन पर हमला करके अपना. शिकार बना रहे हैं। देवेन्द्र गौड़ जो दशकों से वन और वन्यजीव संरक्षित सुरक्षित रखने हेतू आगजनी करने वालों के खिलाफ सुबे के मुख्यमंत्री एवं भारतीय वन अधिनियम के तहत कठोर से कठोर नियम बनाने को लेकर सूबे के तमाम जिला मुख्यालयों में जाकर जिलाधिकारी को ज्ञापन दे रहे हैं तथा जंगलो में आग और धुंआ दिखने पर ड्रोन कैमरे से निगरानी रखने का सुजाव दे रहे हैं ताकि चंद तिनके चारे के लिए आगजनी करने वालों के खिलाफ कार्रवाही की जा सकें, लेकिन सरकारों ने अभी तक इस कोई भी उचित कदम नहीं उठाया है। यही वजह है कि पहाड़ों में बंदर, जंगली सुवर कास्तकारों की फसलें बर्बाद कर रहे हैं और बाघ, भालू रियासती इलाकों मे आकर आमजनो पर हमला करके अपना शिकार बना रहे हैं।

कार्यक्रम में अमृता बहुगुणा ने कहा कि हम सभी का कर्तव्य बनता है कि क्यूं हम हर गांव गांव जाकर एक संगठन बनाएं। जिससे वनसंपदा को सुरक्षित और संरक्षित रखा जा सके। जिसमें सीमा कपर्वाण, चंदा बर्तवाल, कांता भण्डारी, कुसुम सेमवाल, संध्या सेमवाल, वीना नेगी, वीना सेमवाल, राजेश्वरी जोशी ने कहा कि हमें हर संभव वनों और वन्यजीवों को बचाने के लिए संघर्षरत और संगठित होकर आगजनी करने वालों के खिलाफ कार्रवाही करने के लिए दबाव बनाना होगा तभी हमारी शैक्षणिक आध्यात्मिक यात्राएं सफल होंगी।

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