रुद्रप्रयाग। दीपावली के पावन पर्व पर विश्वप्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम को भव्य एवं दिव्य रूप से सजाया गया है। मंदिर परिसर और प्रांगण को करीब 18 से 20 क्विंटल विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया है। फूलों से सजे बाबा केदार के धाम की अलौकिक छटा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

शनिवार को केदारनाथ धाम के क्षेत्रपाल एवं रक्षक भगवान भुकुंट भैरवनाथ के कपाट विधि-विधान, पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। भैरवनाथ के कपाट बंद होने के साथ ही बाबा केदारनाथ के कपाट बंद होने की पारंपरिक प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के सदस्य डॉ. विनीत चंद्र पोस्ती ने धाम से जानकारी साझा करते हुए देश एवं प्रदेशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बताया कि भगवान भुकुंट भैरवनाथ के कपाट बंद होने का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है। इस अवसर पर स्थानीय हक-हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित समाज, मंदिर समिति के अधिकारी-कर्मचारी तथा पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन के कार्मिक मौजूद रहे।
डॉ. पोस्ती ने बताया कि आगामी 11 नवंबर को धार्मिक परंपराओं एवं विधि-विधान के साथ भगवान केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इसके साथ ही इस वर्ष की केदारनाथ यात्रा का विधिवत समापन हो जाएगा। बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल की ओर प्रस्थान करेगी।
उन्होंने श्रद्धालुओं से दीपावली के पावन अवसर पर केदारनाथ धाम पहुंचकर दीप प्रज्वलित करने और दीपोत्सव को श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाने की अपील की। साथ ही धाम की धार्मिक मर्यादा, पवित्रता एवं स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालु किसी भी प्रकार की अव्यवस्था एवं असामाजिक गतिविधियों से दूर रहें और धाम में शांति, सौहार्द एवं धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने में सहयोग करें।
इस अवसर पर केदारसभा अध्यक्ष राजकुमार तिवारी, तीर्थ पुरोहित हिमांशु तिवारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे। डॉ. पोस्ती ने समस्त श्रद्धालुओं के सुख, समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
